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बांग्लादेश में बनाया गया ‘ईको कूलर’, चलाने के लिए नहीं होती पानी और बिजली की जरूरत

बीतो दिनों भारत कई हिस्सो में सूरज ने जमकर आग बरसाई। कई हिस्सों में पारा 45-46 डिग्री तक पहुंच गया है। कई घरों में कूलर खूब चले तो कई घरों में लोगों ने एसी से ठंडक पाई।

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Ambuj Shukla

Jul 01, 2016

बीतो दिनों भारत कई हिस्सो में सूरज ने जमकर आग बरसाई। कई हिस्सों में पारा 45-46 डिग्री तक पहुंच गया है। कई घरों में कूलर खूब चले तो कई घरों में लोगों ने एसी से ठंडक पाई। हालांकि अपने देश में एक बड़ी आबादी ऐसी भी है, जिसके पास झुलसाती गर्मी से राहत पाने के लिए ना पंखा है और ना ही कूलर है।

कुछ शहरों के इलाकों में तो ऐसा भी हाल है कि कूलर या एसी चलाने के लिए बिजली का ही कोई भरोसा नहीं होता। भारत की तरह बांग्लादेशश के ग्रामीण इलाकों में भी कई लोग टिन की छत वाले घरों में रहते हैं। दोपहर में तपती लोगों की छतें गर्मी में घर को किसी भट्टी की तरह गर्म कर देती हैं।

लेकिन बांग्लादेश में इस मुश्किल को आसान करने काएक उपाय खास उपाय खोजा गया है, जो कि आपको चौंकने पर मजबूर कर सकता है। यह उपाय है घर को ठंडा करने के लिए बनाया गया एक ऐसा कूलर, जिसके सके लिए ना तो बिजली की जरूरत होती है और ना ही पानी की। इस कूलर को इको कूलर कहा जा रहा है। इको कूलर और कुछ नहीं एक ग्रिडनुमा व्यवस्था है, जो आधी कटी हुई प्लास्टिक की बोतलों से बनता है।

इस ग्रिड को खिड़की पर फिट कर दिया जाता है। बोतल के चौड़े हिस्से से घुसने वाली गर्म हवा जब इसके संकरे हिस्से में पहुंचती है तो ‘कंप्रेस’ हो जाती है और फिर यह दूसरे छोर से बाहर निकलती है तो थर्मोडायनेमिक्स के नियमों के मुताबिक थोड़ी ठंडी हो जाती है, यही ठंडी हवा कमरे में दाखिल होकर राहत पहुंचाने का काम करती है, बताया जा रहा है कि इससे तापमान पांच डिग्री तक घट जाता है।

यह जुगत एडवरटाइजिंग एजेंसी ग्रे बांग्लादेश और ढाका स्थित एक तकनीकी कंपनी ग्रामीण इंटेल सोशल बिजनेस ने विकसित की है। इसके बनने में जो सामग्री लगती है, वह आसानी से मिल जाती है, जिसके चलते इको कूलर गर्मी में राहत पहुंचाने का एक सस्ता और बढ़िया विकल्प साबित हो रहा है।

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