कोटा . यदि आप में हुनर है तो कॉलेज में पढ़ाई के साथ आसानी से कुछ कमा भी सकते हैं। जेडीबी कॉलेज में पायलट प्रोजेक्ट ( Pilot project ) पर प्रदेश की ‘पहली सीखो कमाओ योजना शुरू हुई। ( Seekho Aur Kamao scheme ) कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ छात्राओं को वेस्ट से बेस्ट चीजें बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। कॉलेज इसके लिए ई-लर्निंग बाजार ( E-learning market ) भी उपलब्ध करवाएगा।
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यह योजना जेडीबी कला महाविद्यालय ( JDB Government Girls Arts College ) में नियमित पढऩे वाली छात्राओं के लिए लागू की गई है। ( Seekho Aur Kamao scheme Launched ) छात्राओं को पढ़ाई के साथ खाली पीरियड में बाकायदा स्किल डवलपमेंट ( skill development ) की ट्रेनिंग दी जाएगी। सप्ताह में चार दिन एक-एक घंटे का समय देकर छात्राएं अपनी प्रतिभा को निखार सकती हैं। अच्छी बात यह है कि इस लर्निंग द अर्निंग कार्यक्रम ( Learn and Earn Progrmme ) से होने वाली कमाई से 70 प्रतिशत हिस्सा छात्राओं को व 30 प्रतिशत हिस्सा कॉलेज विकास के लिए निर्धारित किया गया है।
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इनका मिलेगा प्रशिक्षण
यहां छात्राओं को वेस्ट से बेस्ट चीजें बनाने जैसे आचार मुरब्बा, साबुन, अमृत धारा, हैंड बैग, केरी बैग, पेपर बैग, आसन, फ ोटो फ्रेम, पोटली बैग, फोल्डर सेमिनार, मेहंदी, साड़ी फ ॉल लगाना, रफू , चाय बनाना, नाश्ता, खाना पकाना सहित ब्यूटीशियन का कोर्स करवाया जाएगा। जरूरत के हिसाब से बाकायदा ट्रेनर को बुलाकर छात्राओं को विभिन्न विधाओं के गुर सिखाए जाएंगे, फि र ट्रेंड हुई छात्राएं अन्य छात्राओं को गुर सिखा सकती हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य पढ़ाई के साथ छात्राओं का स्किल डवलप करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
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इनका मिला ऑर्डर
कॉलेज छात्राओं द्वारा तैयार किए गए पोटली बैग के 60 पीस का ऑर्डर मिला है। एक पोटली बैग की 85 रुपए है। 3 किलो दाना मैथी का अचार, 2 किलो कैरी का अचार भी बेचा जा चुका है। छात्राओं द्वारा तैयार की गई सामग्री का ऑनलाइन ऑर्डर लेने की भी तैयारी है। वहीं कॉलेज कैम्पस में केनोपी लगाकर, रोजगार मेले में स्टॉल लगाकर भी सामग्री को बेचा जाएगा।
सोशल मीडिया भी बनेगा सहारा
सीखो कमाओ योजना में तैयार सामग्री को बेचने कर लिए कॉलेज प्रशासन ने बाकायदा प्लान भी तैयार किया है। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए यहां तैयार हुए प्रोडक्ट की मार्केटिंग की जाएगी। एक पेज पर तैयार प्रोडक्ट की जानकारी साझा की जाएगी। कार्यक्रम को अभी ट्रायल बेस पर रखा गया है। ऑर्डर मिलने पर उनकी होम डिलीवरी तक होगी।
बनेंगी आत्मनिर्भर
जेडीबी आट्र्स कॉलेज में करीब 6 हजार छात्राएं अध्ययनरत हैं। उम्मीद है कि सीखो कमाओ योजना जैसे नवाचार से छात्राओं को सम्बल मिलेगा। छात्राएं आत्मनिर्भर बनने के साथ रोजगार पा सकेंगी।
डॉ. प्रेरणा सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर, टेक्सटाइल विभाग जेडीबी