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जनता के लिए लगाई गई सरकारी कार्यालयों में ई-मित्र मशीनें हुईं कबाड़, सॉफ्टवेयर अपलोड नहीं

डिजिटली काम को प्रोत्साहित करने तथा लोगों की सुविधा के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के 33 जिलों की 328 तहसील और 171 उप तहसील मुख्यालयों सहित विभिन्न स्थानों व सरकारी कार्यालयों में 14891 ई-मित्र मशीनें लगाई गई थीं। करीब 3.72 अरब रुपए की लागत से राज्यभर में मशीनें लगाई गईं, लेकिन ज्यादातर जगह ये मशीनें किसी काम नहीं आईं। ये मशीनें इसलिए लगाई गई थीं कि सरकारी विभागों में लोगों को डिजिटली दस्तावेज के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़े

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कोटा

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Abhishek Gupta

Jan 28, 2024

डिजिटली काम को प्रोत्साहित करने तथा लोगों की सुविधा के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के 33 जिलों की 328 तहसील और 171 उप तहसील मुख्यालयों सहित विभिन्न स्थानों व सरकारी कार्यालयों में 14891 ई-मित्र मशीनें लगाई गई थीं। करीब 3.72 अरब रुपए की लागत से राज्यभर में मशीनें लगाई गईं, लेकिन ज्यादातर जगह ये मशीनें किसी काम नहीं आईं। ये मशीनें इसलिए लगाई गई थीं कि सरकारी विभागों में लोगों को डिजिटली दस्तावेज के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़े, लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण मशीनें कबाड़ हो रही हैं। अकेले कोटा जिले में करीब 8 करोड़ की लागत की 398 ई-मित्र प्लस मशीनें कबाड़ हो गई हैं। कई विभागों में इन मशीनों के सॉफ्टवेयर ही अपलोड नहीं किए गए। इस कारण मशीनें एक भी दिन काम नहीं आईं। प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर सरकारी विभागों में यह मशीनें कबाड़ में धूल खा रही हैं।

धूल की परत छाई

पत्रिका संवाददाता ने जब जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, पंचायत समिति कार्यालय, जिला उद्योग केन्द्र, जेके लोन अस्पताल, नया अस्पताल, ग्राम पंचायतों समेत अन्य विभागों में मशीनों का जायजा लिया तो उपयोग नहीं आने से इन पर धूल की परत छाई हुई थी।

शुरू होने पर ये सुविधाएं मिलेंगी
ई-मित्र प्लस मशीन में कैश एसेप्टर, कार्ड रीडर, मेटेलिक की-बोर्ड, थर्मल एवं लेजर प्रिंटर है। जरूरी दस्तावेज के प्रिंट भी इसी मशीन से निकाल सकते हैं। सुविधा का भुगतान भी लोगों को मशीन में करना है। इसमें एटीएम कार्ड एवं नकद भुगतान दोनों की व्यवस्था है। साथ ही, ग्राम पंचायतों में विभिन्न प्रमाण पत्र, जमाबंदी नकल निकालने की सुविधा भी उपलब्ध करवाई थी।

खत्म हो गया टेंडर

इन मशीनों के रखरखाव का जिम्मा एक निजी कम्पनी को दिया हुआ है, लेकिन उसका टेंडर खत्म हो गया। उसके बाद जयपुर मुख्यालय से उसका रिवाइज टेंडर नहीं हो सका है।

सरकारी विभागों के कार्यालय अधीक्षकों को हमने पाबंद कर रखा है कि वे इन मशीनों को चालू रखने के लिए कार्मिक नियुक्त करें, लेकिन वे ध्यान नहीं दे रहे। मैंटेनेंस का टेण्डर खत्म हो गया है। टेण्डर मुख्यालय से रिवाइज होना है। इस बारे में पत्राचार किया जा रहा है।

– मुकेश विजय, संयुक्त निदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, कोटा