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राजस्थान में चीता कोरिडोर योजना पकड़ेगी रफ्तार, रावतभाटा व मुकुन्दरा में घूमेंगे MP के चीते!

Cheetah Corridor Project: दक्षिण अफ्रीका से लाए चीते गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ने के साथ ही देश में चीतों के दो ठिकाने हो गए हैं। इस शिफ्टिंग के साथ ही राजस्थान में भी चीता कोरिडोर योजना रफ्तार पकड़ेगी।

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कोटा

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Anil Prajapat

Apr 21, 2025

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Cheetah Corridor: कोटा। दक्षिण अफ्रीका से लाए चीते पावक व प्रभाष को कूनो से गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ने के साथ ही देश में चीतों के दो ठिकाने हो गए हैं। इन दोनों को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मंदसौर के गांधी सागर के खुले बाड़े में रिलीज किया। अब यही इनका स्थाई रहवास होगा। इस शिफ्टिंग के साथ ही चीता कोरिडोर योजना को भी रफ्तार मिली है। इस अवसर पर खुद मप्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल्द ही चीतों का कॉरिडोर भी बनाएंगे।

इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि इस शिफ्टिंग के बाद गांधी सागर से रावतभाटा व मुकुन्दरा में चीतों के आने की संभावना बढ़ेगी। कूनो से श्योपुर, रणथंभौर होते हुए भी चीतों का मूवमेंट बनेगा। इससे प्राकृतिक रूप से भी कॉरिडोर विकसित होगा। विशेषज्ञों ने पहले भी राजस्थान के सभी टाइगर रिजर्व में मुकुन्दरा हिल्स को ग्रासलैंड की वजह से चीतों के लिए उपयुक्त बताया था। देश में एक से दूसरे स्थान पर चीतों के विस्थापन की दृष्टि से यह पहली शिफ्टिंग है। इस शिफ्टिंग को हाल ही में चीता स्टेयरिंग कमेटी ने मंजूरी दी थी।

17 हजार किलोमीटर का बनेगा कॉरिडोर

मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश के बीच 17 हजार किलोमीटर का चीता कॉरिडोर बनना है। इसमें राजस्थान के कॉरिडोर का एरिया करीब 6500 किमी है। जिसमें कोटा संभाग के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के साथ सवाईमाधोपुर, करौली और चित्तौड़गढ़ भी शामिल है।

यह भी पढ़ें: राजस्थान-मध्यप्रदेश चीता कॉरिडोर योजना को लगेंगे पंख

एक्सपर्ट व्यू : प्राकृतिक कॉरिडोर विकसित होगा

गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़ने का असर राजस्थान पर भी होगा। इससे जहां प्राकृतिक कॉरिडोर विकसित होगा, वहीं सरकार की चीता कॉरिडोर योजना भी रफ्तार पकड़ेगी। अब यहां भी चीतों के संरक्षण की दृष्टि से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने होंगे। बाघ व चीते, पैंथर व भालू जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी से पर्यटन के अवसर बढ़ेगे। अब जरूरी है कि मुकुन्दरा में भी चीतों को लाने के प्रयास हों।
-दौलत सिंह शक्तावत, सेवानिवृत्त उपवन संरक्षक व वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट


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