आउट्राम घाट पर लगे गंगासागर मेला में देश के विभिन्न हिस्सों से आये तीर्थयात्रियों के अद्भुत संगम से महाकुम्भ की सी छटा नजर आई। जहां तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ा वहीं बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने सेवा कार्यों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस दौरान भ्रमण करने वाले लोगों की संख्या भी खासी रही और भारी भीड़ के बावजूद कतार में लग कर बाबाओं से आशीर्वाद लेते दिखाई दिए। शिविरों में सेवा कार्य चरम पर रहने के उलट तीर्थयात्रियों ने समय बिताने के लिए सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ तथा भजन कीर्तन किया। वहीँ काफी लोगों ने मेला प्रांगण में रहते हुए अपनी खरीददारी पूरी की। बलिया से आई शकुंतला देवी ने कहा कि कुछ अतिरिक्त समय हाथ में है इसलिए सिंदूर और चूडिय़ां जैसी यहाँ की मशहूर चीजों की खरीदारी की। शिविर में सेवा कार्य कर रहे अनुपम कौशिक ने कहा कि अब सागर की ओर रवाना होने का सिलसिला शुरू हो गया है काफी लोगों ने सोमवार को स्नान किया जबकि मंगलवार को भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि तीर्थयात्रियों के कदम गंगासागर मेले की ओर है। मेला में आये लोगों ने एक तरफ जहाँ सेवा कार्यों और शिविर व्यवस्था की भरपूर सराहना की वहीँ काफी जगहों पर भाषा की समस्या उनके आड़े आई। चंदौली से आये रानबिलास वर्मा ने कहा कि यहाँ के स्थानीय मंदिर आदि जाना चाहते थे लेकिन हर जगह भाषा समझने में दिक्कत हुई। उन्होंने कहा कि कई बार तो पुलिस वाले ने भी असमर्थता जताते हुए किसी और से पूछने कि सलाह दे दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह शहर नया है इसलिए किसी तरह की आफत से बचने के लिए हम बाहर न जाकर यही समय बिता रहे हैं।