स्वामी विवेकानंद की जयंती की रविवार को धूम रही। कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में कई आयोजन हुए। स्कूली बच्चों को लेकर रैलियां निकाली गई। कोलकाता में उनके निवास स्थल पर विशेष आयोजन हुए। कुछ लोग उन्हें आध्यात्मिक गुरु, तो कुछ लोग उन्हें भगवान भी मानते थे लेकिन, विवेकानंद ने हिंदू संत होने के बावजूद हमेशा मानवता को ऊपर रखा। वे शांति और मानवता के मशाल वाहक थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत विकास और सामाजिक प्रगति के लिए शिक्षा आवश्यक है और उन्होंने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उनकेजीवन के सबक आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि वे पूर्ण जीवन जीने, दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालने और आध्यात्मिक विकास हासिल करने के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आत्म-विश्वास, सेवा, ध्यान, सकारात्मकता, विविधता, शिक्षा, सावधानी, अनुशासन, निडरता और करुणा पर उनकी शिक्षाएं सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं। स्वामी विवेकानंद ने अपनी शिक्षाओं से दुनिया भर के लाखों युवाओं को प्रेरित किया। वर्ष 1893 में शिकागो में एक सम्मेलन में उनकी प्रमुखता महसूस की गई, जहां वे एक प्रतिभागी और वक्ता थे। भारत की आध्यात्मिकता से प्रेरित संस्कृति और मजबूत इतिहास पर उनके प्रसिद्ध भाषण ने अमरीकियों, विशेष रूप से बौद्धिक वर्ग से प्रशंसा प्राप्त की।