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स्वाइन फ्लू से इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड केयर अस्पताल में बच्ची की मौत

डेंगू के बाद अब राज्य में स्वाइन फ्लू से ७ वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची का नाम श्रीतमा राय (7) है।

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kolkata west bengal

स्वाइन फ्लू से इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड केयर अस्पताल में बच्ची की मौत

डेंगू के बाद अब राज्य में स्वाइन फ्लू से 7 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची का नाम श्रीतमा राय (7) है। श्रीतमा बाकुं ड़ा के कोतुलपुर की निवासी थी। श्रीतमा के परिजनों ने उसे पार्क सर्कस स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड केयर में भर्ती कराया था। जहां बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि जब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब उसके फेफेड़े में स्वाइन फ्लू का संक्रमण बुरी तरह से फैल गया था। उसे तभी से वेंटिलेंशन पर रखा गया था। परिजनों का कहना है कि गत ४ सितम्बर से श्रीतमा ज्वर से पीडि़त थी। पहले ज्वर आने के बाद कुछ दिनों के भीतर ठीक हो गया। उसके २-३ दिन बाद फिर से उसे ज्वर आने लगा। उसके बाद तेज ज्वर से श्रीतमा लगातार पीडि़त रहने लगी। वहां भी डॉक्टरों को दिखाया गया, पर जब उसकी स्थिति गंभीर होने लगी तो परिजन उसे लेकर कोलकाता चले आए। उसे पार्क सर्कस स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मौत क ी संख्या बढक़र हुई २

मालूम हो किश्रीतमा की मौत के बाद राज्य में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या २ हो गई है। गत २९ अगस्त को राज्य में स्वाइन फ्लू से पहली मौत हुई थी। दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप की निवासी देवला मंडल की मौत हुई थी। देवला मंडल कई दिनों से सर्दी खांसी व बुखार से पीडि़त थी। देवला का इलाज पहले काकद्वीप में ही चल रहा था। रक्त परीक्षण भी किया गया था, पर उस रिपोर्ट में कुछ भी सामने नहीं आया था। जब देवला की तबीयत बिगड़ी तो उसे कोलकाता में लाया गया और सीएमआरआई में भर्ती कराने के बाद रक्त परीक्षण कराया गया। जिसमें डॉक्टरों ने एच १ एन 1 वायरस के सक्रंमण से बीमार होने की पुष्टि की। बाद में उसकी मौत हो गई।

चिकित्सा से जरूरी सावधानी

इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड केयर के विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानियां चिकित्सा से कहीं ज्यादा जरूरी है। अस्पताल में स्वाइन फ्लू के 6-7 मामले आए थे। इन सबको नियंत्रण में कर लिया गया। श्रीतमा की तबीयत ज्यादा खराब थी, उसमें संक्रमण इतना अधिक हो गया था कि उसे बचाया नहीं जा सका। स्वाइन फ्लू के इक्के-दुक्के मामले हैं, पर लोगों को इससे अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है। मरीज के साथ उसके परिजनों और चिकित्सा करने वालों को सर्तक रहने की आवश्यकता है।