
कलेक्टर गेट पर धरना देकर बैठी महिलाएं
खरगोन.
मप्र के खरगोन जिले में भीषण गर्मी के साथ ही अब पेयजल संकट की समस्या विकराल रूप लेने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों से स्थिति भयावह होती जा रही हैं। वही शासन-प्रशासन के नुमाइंदें गंभीरता नहीं दिखा रहे। जिसे लेकर अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। शुक्रवार को तहसील के इदारतपुर छालपा से सैकड़ों की संख्या में महिलाएं व पुरुष ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर खरगोन पहुंचे। यहां नए कलेक्टर कार्यालय की चौखट पर धरना दिया। महिलाओं ने गणगौर और लोकगीतों गाते हुए पानी मांगा। जिनका कहना है कि गांव में पीने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। इस भीषण गर्मी में बच्चों और मवेशियों की प्यास कैसे बुझाए। लंबे समय से टैंकरों से पानी खरीदी कर पी रहे है। इस साल समूचे क्षेत्र में बिलकुल बारिश नहीं हुई। जिससे यह हालत बने हैं। वहीं अधिकारी हमारी परेशानी को सुनने को तैयार नहीं। यह धरना प्रदर्शन खबर लिखे जाने तक जारी रहा।
कलेक्टर भी एक महिला है, वह भी परेशानी समझे
महिला बसंतीबाई, सुधा पाटीदार, कृष्ण पाटीदार ने कहा हम महिलाएं और पानी को लेकर ज्यादा परेशान है। कब तक बोझ उठाकर यहां-वहां से पानी लाए। कलेक्टर को हमारी समस्या सुनना चाहिए क्योंकि वह भी एक महिला है, जो परेशानी को समझ सकती है। महिलाओं ने नर्मदा हर के नारे लगाते हुए नर्मदा उद्वहन योजना से गांव में पानी देने की मांग पूरजोर तरीके से उठाई।
डिप्टी कलेक्टर को बैरंग लौटाया
उधर, एक साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने से कलेक्टोरेट कार्यालय भी हड़कप मच गया। डिप्टी कलेक्टर व पीएचई के एसडीओ ग्रामीणों से चर्चा करने आए। लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि वह आज यहां आश्वासन सुनने नहीं आए। बल्कि पानी मांगने आए और पानी मिलने के बाद ही उठेंगे। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर ओम नारायण सिंह बड़कुल को बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीण कलेक्टर से मुलाकात की बात पर अड़े हुए है।
पीएचई अधिकारी गांव के लिए रवाना
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारी भी जागे और आनन-फानन में प्रशासनिक अमला छालपा के लिए रवाना हुआ। बातचीत में तय हुआ है गांव में सर्वे कर पेयजल व्यवस्था का समाधान किया जाएगा। वहीं ग्रामीण धरने पर ही बैठे रहेंंगे।
Published on:
08 Apr 2022 01:19 pm
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