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…इसलिए है मां नर्मदा नदी का इतना महत्व

सनातन धर्म संस्कृति का जन्म मां नर्मदा के तट पर हुआ है। जिसे देखने से ही पुण्य प्राप्त हो जाता है। सत्यनारायण का जन्म भी नर्मदा किनारे हुआ है।  

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खंडवा

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seraj khan

Oct 29, 2017

Narmada river

Narmada river

बीड (खंडवा).
सिंगाजी ताप परियोजना आवासीय परिसर सिवरिया कॉलोनी में पॉवर इंजीनियर एंड एम्प्लॉई एसोसिएशन की ओर से मां नर्मदा जीवनदायिनी विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी ने कहा सनातन धर्म संस्कृति का जन्म मां नर्मदा के तट पर हुआ है। जिसे देखने से ही पुण्य प्राप्त हो जाता है। सत्यनारायण का जन्म भी नर्मदा किनारे हुआ है।

नर्मदा का अर्थ है नाम्रता अर्थात जो कभी नहीं मरती। डॉ. श्रीराम परिहार ने कहा मानव जन्म की जन्म दायनी हैं मां नर्मदा। पुराणों में इसकी लंबी कहानी है। सिर्फ नर्मदा नदी पर ही पुराण बना है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि सबसे पुरानी नदी मां नर्मदा हैं। मानवीय सभ्यता मां नर्मदा किनारे खेली है। वक्ताओं ने कहा कि मां नर्मदा की धार से कटे हुए कंकर को पूरे भारत की नदियों में देखा जा सकता है।

नर्मदा पूरब से पश्चिम तक बहती हैं। कितने जलाशयों को भरती हैं। यह वह नदी है, जिसका जन्म पर्वत से नहीं हुआ है। दो जंगलों के बीच से निकलने वाली नदी है। नर्मदा के प्राण हैं पेड़। इसलिए जितने पेड़ लगेंगे उतनी अच्छी बारिश होगी। हम देखते हैं कि हम घर से प्लास्टिक के अंदर प्रसाद तो ले कर जाते हैं, लेकिन पन्नी पानी में डाल देते हैं। आज मां नर्मदा के जल को पोखरों में बदल दिया गया है। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि संजय विनायक जोशी सहित ममता चौरे, हरि शंकर आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

समिति की ओर से वक्ताओं को स्मृति चिंह्न भेंट किए गए। संगोष्ठी का आयोजन पॉवर इंजीनियर्स एंड एम्प्लॉईज एसो. की ओर से आवासीय परिसर में किया गया। अध्यक्षता एसो. अध्यक्ष कुलदीप सिंह गुर्जर ने की। कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ श्रीवास्तव, क्षेत्रीय सचिव संजय जोशी, लायंस क्लब से सुरेश खनूजा, केके शर्मा सहित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।