
खंडवा।। जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना...किशोर दा(Kishore Kumar superhit songs) का यह गीत उनकी जिंदगी की तस्वीर भी बयां करता है। शायद यही कि लव, ट्रेजडी, ड्रामा, एक्शन हर चीज उनकी जिंदगी में अंत समय तक जुड़े रहे। आज सुरों में सधी हर किसी पर अपना जादू चलाने वाली आवाज के मालिक किशोर कुमार की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। आज हम आपको बता रहे हैं उनके जीवन के कुछ ऐसे किस्से जिन्हें सुनकर आप भावुक भी होंगे तो हैरान भी। पढ़ें पूरी खबर...
सीएम ने किया ट्वीट
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर किशोर दा (Kishore Kumar superhit songs) को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है 'कभी अलविदा न कहना..जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं.. छूकर मेरे मन को.. जैसे असंख्य गीतों को अपनी आवाज देकर अमर कर देने वाले महान गायक, खण्डवा के लाल स्व. किशोर कुमार जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।'
कई ख्वाहिशें रह गईं अधूरी
हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार (Kishore Kumar superhit songs) प्रदेश के खंडवा के रहने वाले थे। उनकी जिंदगी के कुछ किस्से इतने मशहूर हुए कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं। मुंबई में निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार उन्हीं की इच्छा के अनुसार उनके जन्म स्थान मध्यप्रदेश के खंडवा में किया गया था। उनकी यह अंतिम इच्छा तो पूरी हो गई, लेकिन कई ख्वाहिशें थीं जो अधूरी ही रह गईं। उनमें से एक थी कि खंडवा में बसने की चाह लेकिन, यह नहीं हो सका। किशोर के चाहने वाले आज भी कहते हैं कि यदि वे होते तो बात ही कुछ ओर होती।
ये सपना भी रह गया अधूरा
किशोर दा का एक सपना था। वह (Kishore Kumar superhit songs) अपने पैतृक शहर खंडवा में वेनिस जैसा एक घर बनाना चाहते थे। उन्होंने मजदूरों को बंगले के चारों तरफ एक नहर खोदने को भी कह दिया था, यह खुदाई महीनों तक होती रही, लेकिन बीच में एक कंकाल का डरावना हाथ मिलने से हड़कंप मच गया था, तब मजदूर वहां से भाग खड़े हुए और किशोर दा का यह सपना टूट गया।
बगैर फीस लिए नहीं गाते थे किशोर
किशोर दा के बारे में इस बात को लेकर कई किस्से मशहूर हैं कि उन्होंने (Kishore Kumar superhit songs) कभी बिना फीस लिए कोई गीत नहीं गाया। लेकिन, यह वाकया बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मकार सत्यजीत रे के मशहूर बांग्ला शाहकार चारूलता के लिए 1964 में उन्होंने गाने के एवज में बतौर पारिश्रमिक कोई फीस नहीं ली।
खंडवा के दही-बड़े, पोहा जलेबी थे पसंद
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में पोहे-जलेबी, दूध-जलेबी, दही बड़े हर गली-मोहल्ले हर घर की सुबह का हिस्सा होते हैं। यह स्वाद उन्हें (Kishore Kumar superhit songs) भी इतना पसंद था कि जब चाहे उन्हें खाने के लिए मुंबई से खंडवा चले आते थे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि किशोर दा मायानगरी मुंबई में बस जरूर गए थे, लेकिन उनका दिल खंडवा आने के लिए ही धड़कता रहता था।
किशोर की धरोहर हो चुकी जर्जर
खंडवा स्थित किशोर दा (Kishore Kumar superhit songs) के बंगले को देखने लोग आज भी पहुंच जाते हैं। इस बंगले का नाम है गांगुली सदन। जर्जर हो चुके इस बंगले में प्रवेश करते ही ऐसा आभास होता है कि किशोर यहीं-कहीं है और गुनगुना रहे हैं। हालांकि अब यह बंगला बेच दिया गया है। किशोर दा के बचपन से जुड़ी चीजें आज भी बंगले में रखी हुई हैं। जिस कमरे में किशोर दा का जन्म हुआ था, वह पलंग आज भी रखा हुआ है। जो धूल खा रहा है। प्रथम तल पर जाने के लिए लकड़ी की सीढिय़ां बनी थीं, जो क्षतिग्रस्त हो गई है। बंगले के आसपास के दुकानदार खराब सामान यहीं पटक जाते हैं।
परिजन भी नहीं देते ध्यान
नगर निगम के रिकॉर्ड में किशोर कुमार का बंगला उनके पिता कुंजीलाल गांगुली के नाम पर है। बंगले पर करीब 42 साल से चौकीदारी करने वाले बुजुर्ग सीताराम बताते हैं कि कई बार मुंबई मे रहने वाले किशोर दा (Kishore Kumar superhit songs) के परिजनों को बंगले का रखरखाव करने के लिए सूचना दी गई, लेकिन किसी ने भी रुचि नहीं ली। कुछ माह पहले जब बंगले की दीवार गिरने की सूचना भेजी गई तो वहां से कहा गया कि गिर जाने दो।
(Kishore Kumar superhit songs) पढ़ें ये रोचक फैक्ट
1. किशोर दा (Kishore Kumar superhit songs) का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।
2. खंडवा के जिस बंगले में उनका जन्म हुआ था, वह बंगला आज भी है, लेकिन जर्जर हालत में है।
3. बंगले में वह पलंग भी है जिस पर उनका जन्म हुआ था। इसके अलावा वे तमाम चीजें हैं जिनके साथ किशोर कुमार बचपन में खेला करते थे।
4. किशोर कुमार ने 13 अक्टूबर को 1987 में अंतिम सांस ली थी।
5. किशोर कुमार बगैर फीस लिए एक भी गाना नहीं गाते थे।
6. जब मन करता था तो दही-बड़े खाने खंडवा चले आते थे।
7. अटपटी बातों के वे चटपटे अंदाज में जवाब देते थे। नाम पूछने पर वे बताते थे रशोकि रमाकु।
Updated on:
13 Oct 2022 02:00 pm
Published on:
13 Oct 2022 01:54 pm
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