
DP-Pole collapsed in the first storm and rain, fear of accident
बड़वानी. गांव-गांव में रोशनी पहुंचाने वाले विद्युत पोल को लगाने में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। मुख्य रूप से ग्रामीण अंचल में नियम कायदों के विपरित चलाऊ काम हो रहा है। दो दिन पूर्व प्री मानसून के दौरान चली हवा-आंधी ने विद्युत पोल लगाने की प्रक्रिया के झोल की पोल खोल दी। हवा-आंधी से बड़ी संख्या में विद्युत पोल धराशायी हो गए और कई जगह विद्युत डीपी जमींदोज हो गई।
उल्लेखनीय है कि मुख्य रूप से जहां-जहां विद्युत पोल या डीपी गिरी हैं, अधिकांश खेतों की जमीनों पर ऐसी स्थिति बनी है। ऐसे में बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। मानसून के पूर्व पहली हवा-आंधी से खेतों में गिरे पोल-डीपी ने ठेकेदारों की लापरवाही और विद्युत कंपनी के अधिकारियों की अनदेखी देखने को मिली है। बता दें कि अधिकांश स्थानों पर अब विद्युत कंपनी द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से ही विद्युत तार बिछाने, पोल लगाने व डीपी स्थापित करने के कार्य किए जाते हैं। इसमें गुणवत्ता का ध्यान रखना होता है। वहीं कार्य के दौरान और पूर्ण होने पर विद्युत कंपनी के जिम्मेदारों को इसकी पूरी मॉनिटरिंग कर नियम व मजबूती का ध्यान रखना होगा। जबकि जिले में इसके विरुद्ध स्थिति नजर आती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कंपनी द्वारा पोल या डीपी स्थापित करवाने या लाइन बिछाने के दौरान नियम कायदों को ताक में रखकर ग्रामीण व किसानों की जान से खिड़वाल किया जा रहा है।
इनके खेतों में गिरे पोल, हादसों से बचे
राजपुर में क्षेत्र में हवा-आंधी के दौरान अनिता पति मोतीलाल के खेत में 33 केवी लाइन नरावला ग्रिड का पोल गिरा। पोल की नींव में मिट्टी के अलावा पत्थर सीमेंट नहीं दिखे। जबकि बादलों की मौजूदगी में किसान व मजदूर खेत तैयारी में जुटे थे, ऐसे में बड़ी जनहानि हो सकती थी। वहीं खेत में ही एक पोल गिरने से उच्च दाम की लाइन निम्न दाम की लाइन पर गिरी, इससे कतारबद्ध पांच पोल गिर गए। इसी तरह भारत रायक के अनुसार खेत में चार-पांच पोल धराशायी हो गए।
सीमेंट भूले, पत्थर की जगह मिट्टी डाल रहे
ग्रामीण क्षेत्रों व खेतों में जमीन कमजोर होती है। वैसे विद्युत पोल लगाने के दौरान उसकी कुल लंबाई के अनुपात एक चौथाई गड्ढा खोदकर पत्थर और गिट्टी माल डालकर मजबूत नींव बनाई जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान में कम समय में जल्द काम निपटाने के चक्कर में पोल की गहराई की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मंशाराम पंचोले के अनुसार पोल की लंबाई के हिसाब से एक चौथाई 24 छह गहराई होना चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा पत्थर डालना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां-जहां पोल गिरने की शिकायत मिली थी, वहां पर पोल गाड़कर लाइन सुचारु की गई है। आपदा रहती है, हवा का प्रेशर रहता है। इसकी वजह से पोल गिर जाते है। ग्रामीणों मेें घरेलू लाइट के सारे चालू कर दिए हैं। खेतों की लाइन के पोल बचे हैं। उन्हें भी जल्द सुधार कर दिया जाएगा।
सुरेंद्र सूर्यवंशी, अधीक्षण यंत्री बड़वानी
Published on:
15 Jun 2022 07:50 pm
बड़ी खबरें
View Allखंडवा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
