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पानी उतरा, बीमारी, मकान गिरने का बढ़ा खतरा 

कटनी नदी के घाट से नीचे पहुंचा पानी, ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात की गईं स्वास्थ्य विभाग की टीम 

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praveen chaturvadi

Aug 22, 2016

barish

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कटनी. पांच दिन लगातार हुई बारिश के बाद दो दिन से मौसम खुलने से लोगों को राहत मिली है लेकिन अब बीमारियां पैर पसारने लगी हैं। वहीं जिन बस्तियों में पानी भर गया था, वहां के मकान की दीवारें कमजोर होने से उनके गिरने का खतरा बढ़ गया है। रविवार को सुबह से जिले भर में मौसम साफ रहा और तेज धूप निकली रही। मौसम के खुलने के साथ ही शहरी सीमा में बारिश में उफनाई कटनी नदी की धार कमजोर पड़ गई और उसके सभी घाट नजर आने लगे।

गाटरघाट में जहां पानी मंदिर से लगभग दूर घाट किनारे पहुंच गया तो मसुरहा व मोहन घाट की पूरी सीढिय़ां नजर आने लगीं। पीपलघाट नदीपार बस्ती व गाटरघाट में लगभग एक दर्जन घरों में पानी भर गया था। बारिश बंद होने से मकानों से पानी निकल गया लेकिन कच्चे मकानों की दीवारें कमजोर होने से उनके गिरने का खतरा बढ़ गया है।
रविवार को मौसम साफ होने पर धंतीबाई स्कूल व रेनबसेरा में ठहरे लोग अपने घरों को देखने पहुंच गए। लोगों ने मकानों की कमजोर दीवारों व छप्परों को सुधारने का कार्य किया। इन बस्तियों में बीमारियां फैलने का भी खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते नगर निगम की स्वास्थ्य विभाग के अमले ने कीटनाशकों का भराव वाले क्षेत्रों में छिड़काव किया।
जिले में बाढ़ के बाद बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य अमले को भी अलर्ट किया गया है। जिले के सभी ब्लाकों की स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर गांवों में लगाई गई हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य की जांच करने के साथ साफ पानी पीने व दूषित खाद्य सामग्री का उपयोग न करने की सलाह दे रही है। रविवार को सीएमएचओ डॉ. अशोक चौदहा भी ढीमरखेड़ा के भूला गांव पहुंचे, जहां लोगों के बीमार होने की सूचना मिली थी। सीएमएचओ की मौजूदगी में गांव में अमले ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉ. चौदहा ने बताया कि गांव में कोई गंभीर पीडि़त मरीज नहीं मिला है और जिन स्थानों पर बीमारी फैलने की आशंका है, वहां अमले को नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बरही तहसील के गैरतलाई गांव की कुटेश्वर माइंस से लगी नई बस्ती में बारिश के चलते पानी भर गया था। जिसके चलते यहां पर रहने वालों को सुरक्षित स्थानों मेंं प्रशासन ने पहुंचाया था और लोगों को खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई थी। बस्ती से पानी निकल गया है लेकिन अधिकांश मकान कच्चे होने से उनके गिरने के खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी मोती कोल ने बताया कि अभी तक लगभग एक दर्जन मकान गिर चुके हैं और पानी उतरने के बाद भी कई घरों के गिरने का अंदेशा बना हुआ है। जिसके चलते लोग स्कूल भवन व आंगनबाड़ी केन्द्र में ठहरे हुए हैं। तहसीलदार अरविंद यादव ने रविवार को शासकीय भवनों में ठहरे लोगों से मुलाकात की और उनकी व्यवस्थाएं देखीं।

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