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कलेक्टर बने शिक्षक, छात्राओं को पढ़ाई गणित, वीडियो में देखें हकीकत

अधिकांश स्कूलों में नहीं लागू हुईं एनसीइआरटी की पुस्तकें

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कटनी

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Balmeek Pandey

Apr 03, 2025

collector taught the girl students

collector taught the girl students

कटनी. जिले के सभी शासकीय स्कूलों में चार दिवसीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम चलाया जा रहा है, इसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक, अभिभावक स्कूल में पहुंचकर नौनिहालों से व विद्यार्थियों से भेंट की। उन्हें बेहतर तरीके से पढ़ाई कर अपने माता-पिता, शहर व गांव का नाम रोशन करने प्रेरित किया। इसी कड़ी में कलेक्टर दिलीप कुमार यादव नगर निगम के केसीएस स्कूल बुधवार दोपहर पहुंचे। यहां पर शिक्षक बनकर छात्रों को पढ़ाया। छात्राओं से प्रेरणादायी संवाद कर जीवन में सफल होने का पाठ पढ़ाया।

कक्षा दसवीं की छात्राओं से ब्लैक बोर्ड में सवाल हल कराए। इस दौरान उन्होंने त्रिभुज के प्रकार, आयत, वर्ग सहित अन्य गणित की जानकारी प्राप्त की, हालांकि इस दौरान छात्राएं कलेक्टर के सवाल का जवाब देने में हिचकिचाती रहीं। कलेक्टर ने छात्राओं को पढ़ा रहे शिक्षक से ही कहा कि आप स्वयं छात्राओं से प्रश्नों के उत्तर पूछें। कलेक्टर ने ब्लैकबोर्ड में आकृति बनाकर व बनवाकर छात्राओं से चर्चा की। इस दौरान कक्षा 10वीं की छात्राएं कलेक्टर के सवालों का जवाब बेबाकी से नहीं दे पाईं। इससे साफ जाहिर हुआ कि शिक्षा की गुणवत्ता में काफी सुधार की आवश्यकता है। सामाजिक विज्ञान में न्यूटन के नियम के बारे में छात्राओं से पूछा।

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सीइओ ने भी जाहिर की चिंता

इस दौरान छात्राओं को बेहतर तरीके से पढऩे व शिक्षकों को भी ठीक से पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। भविष्य से भेंट कार्यक्रम में जिला पंचायत सीइओ (आइएएस) शिशिर गेमावत ने छात्राओं के शैक्षणिक स्तर पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति तो नहीं होनी चाहिए। शिक्षक बेहतर तरीके से अभी से पढ़ाना शुरू करें। इस दौरान उपायुक्त पवन अहिरवार सहित शिक्षक मौजूद रहे।

जिलेभर के हैं यही हाल

बता दें कि बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। कक्षा 5 व 8 का परिणाम भले ही 90 प्लस है, लेकिन बोर्ड के आने वाले परिणाम हकीकत बयां करते हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, दूसरा शिक्षकों का सिर्फ सरकारी नौकरी करना, मन लगाकर न पढ़ाना, अफसरों द्वारा भी सालभर निगरानी न करने के कारण शिक्षा का स्तर नहीं सुधर रहा। अफसर यदा-कदा स्कूलों की नब्ज टटोलते हैं, जिससे ऐसे हालात बनते हैं। वहीं दूसरी ओर शासकीय में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है, जिसको लेकर कलेक्टर ने कहा कि सभी जगह इंतजाम हैं, यदि कहीं पर समस्या होगी तो उसे दिखवाया जाएगा।

अधिकांश स्कूलों में नहीं लागू हुईं एनसीइआरटी की पुस्तकें


शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत हो चुकी है। अभिभावकों ने कॉपी, किताब, स्टेशनरी, यूनीफॉर्म आदि में जेबें ढीली कर चुके हैं। पाठ्यपुस्तक विक्रेताओं द्वारा मनमाने तरीके से पाठ्स सामग्री बेची जा रही है। हैरानी की बात तो यह है कि निजी स्कूलों में सरकार के नियमों का अक्षरसा पालन ही नहीं हो रहा। कई स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एनसीइआरटी की पुस्तकें तो लागू हो गई हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश स्कूल निजी पब्लिकेशन की मनमाने दाम वाली पुस्तकें चला रहे हैं, जिससे अभिभावकों को 5 से 7 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। 90 फीसदी से अधिक अधिवभाकों ने खरीदी कर ली है, लेकिन शिक्षा विभाग व प्रशासन के अधिकारियों ने जांच-कार्रवाई की अबतक कोई जहमत नहीं उठाई। फीस को लेकर भी गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा। इसके अलावा पूर्व के वर्ष में अभिभावकों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन द्वारा साधुराम स्कूल में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था, लेकिन इस साल अबतक कोई पहल नहीं की गई। जब अधिकांश अभिभावकों ने खरीदी कर ली है, तब जाकर अब पुस्तक लगाने की बात प्रशासन कह रहा है।

कलेक्टर ने कही यह बात

दिलीप कुमार यादव, कलेक्टर ने कहा की निजी स्कूलों को तय गाइडलाइन के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पालन करना होगा। यदि नहीं हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। पुस्तकों के लिए जल्द ही एक मेला आयोजित कराया जाएगा।