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टांकों में जल संचय हुआ ना विद्यार्थियों को मिला पेयजल

गुढ़ाचंद्रजी. राज्य सरकार की ओर से विद्यालयों में डेढ़ दशक पहले बरसाती पानी को एकत्र करने के लिए बनाए गए टांके देखरेख के अभाव में हादसे का सबब बन गए हैं। वर्ष 2005 में सरकार ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में टांकों का निर्माण करवाया था। इन टांकों में से पाइप लगाकर बारिश के पानी को एकत्रित करना था। बाद में इस पानी को पेयजल के रूप में भी काम में लेने का सरकार का मानस था, इन टांकों में ना तो बारिश का पानी एकत्र हुआ ना ही स्कूल में पेयजल समस्या का समाधान हुआ। अधिकतर टांकों में तो छत से पाइप

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टांकों में जल संचय हुआ ना विद्यार्थियों को मिला पेयजल

गुढ़ाचंद्रजी. नयावास गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में टूटा टांका।


डेढ़ दशक से नकारा साबित हो रही योजना
गुढ़ाचंद्रजी. राज्य सरकार की ओर से विद्यालयों में डेढ़ दशक पहले बरसाती पानी को एकत्र करने के लिए बनाए गए टांके देखरेख के अभाव में हादसे का सबब बन गए हैं। वर्ष 2005 में सरकार ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में टांकों का निर्माण करवाया था। इन टांकों में से पाइप लगाकर बारिश के पानी को एकत्रित करना था। बाद में इस पानी को पेयजल के रूप में भी काम में लेने का सरकार का मानस था, इन टांकों में ना तो बारिश का पानी एकत्र हुआ ना ही स्कूल में पेयजल समस्या का समाधान हुआ। अधिकतर टांकों में तो छत से पाइप ही नहीं लगाया गया।
हो रहे जर्जर हाल
स्कूलों में अधिकतर टांके जर्जर हाल हो गए हैं। सरकार की ओर से इनको बनाने में लगाई लागत भी बेकार साबित हुई है। इन टांकों में विद्यार्थियों के गिरने का डर भी लगा रहता है। टांकों की दीवारों से प्लास्टिक झड़ चुका है। दलपुरा पंचायत के नयाबास गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सहित अन्य कई विद्यालयों में ऐसे जर्जर टांके नजर आते हैं। टांकों से ढक्कन गायब हो गए और घास उग आई है। सुरक्षा के तौर पर इनको औपचारिक रूप से ढक रखा है।
टांकों में उगी रही घास, गिरने का रहता डर
टांकों में घास फूस उगी होने से ये दिखाई नहीं देते। जिससे विद्यार्थियों को इनमें गिरने का भय रहता है। बारिश के दिनों के बाद टांकों में घास उग आई है। कई विद्यालयों में तो टांके बीच परिसर में है। टांकों से ना तो विद्यार्थियों की प्यास बुझी और ना ही बारिश के पानी का संग्रहण हो सका है।