
Sadhvi Jain
दीनदयाल सारस्वत
हिण्डौनसिटी. मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के झारड़ा कस्बे की अमिता चौरडिय़ा ने पढ़ाई के दौरान कभी कलक्टर बनकर देश सेवा का सपना देखा था, लेकिन उसमें संसार से विरक्ति का भाव इस कदर जागा कि अब आधुनिकता की चकाचौंध के मायाजाल से दूर होकर जैन साध्वी बनकर समाज को नई दिशा देने की ठानी है। अमिता की जैनेश्वरी दीक्षा स्थानीय जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक पल्लीवाल सकल संघ के तत्वावधान में चार दिसम्बर को होगी। इस दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनने के लिए प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मुम्बई, महाराष्ट्र, दिल्ली आदि स्थानों के जैन एवं जैनेतर महोत्सव में शामिल होंगे।
घर में शिक्षा का अच्छा वातावरण एवं खुद भी पढ़ाई में अव्वल रहने पर अमिता ने तय कर रखा था कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर देश सेवा करेंगी। इसके साथ ही वे बच्चों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराने का भी काम करना चाहती थीं। प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए उन्होंने वर्ष 2014-15 में मध्यप्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा दी। प्री और मैन परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2016 -17 में साक्षात्कार होना था, लेकिन समाज को नई दिशा देने की चाह और जीवन की क्षणभंगुरता के बोध ने अमिता का सांसारिक जीवन से मोह भंग कर दिया। उन्होंने विवाह का ख्याल भी त्याग दिया और उसमें संसार से विरक्ति का भाव इस कदर जागा कि अब आधुनिकता की चकाचौंध के मायाजाल से दूर होकर जैन साध्वी बनकर समाज को नई दिशा देने की ठानी है।
पिता प्रकाशचंद चौरडिय़ा एवं माता अंगूरबाला के घर 31 वर्ष पहले जन्मी अमिता बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं। घर में भी धार्मिक माहौल मिला। पिता पेशे से वकील एवं भाई अतुल चौरडिय़ा कपड़ा व्यवसायी है। छोटी बहन परिधि जैन है। उसकी वर्ष 2012 में शादी कर दी गई।
परिवार के सभी सदस्य धार्मिक कार्यों में उत्साह से शिरकत करते आए हैं। खुद अमिता जैन व्रत, उपवास किया करतीं रही हैं। भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र एवं गणित विषय में उज्जैन स्थित एक यूनिवर्सिटी से 6 7 प्रतिशत अंकों से बीएससी की डिग्री हासिल करने के बाद भी मन में धर्म की राह पर चलने की इच्छा बलवती होती गई। वर्ष 2010 में जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनूं से जीव विज्ञान में 78 प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद वर्ष 2014-15 में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से इतिहास में 77 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एमए उत्तीर्ण किया।
अनिश्चितता का
हुआ बोध
दीक्षा महोत्सव आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी राजेश जैन ने बताया कि वकौल मुमुक्षू अमिता के अनुसार जीवन अनिश्चितताओं से भरा है। अपनी दादी के संसार त्यागने एवं चचेरी भाभी को कैंसर होना उसे अंदर तक झकझोर दिया। उसके बाद से ही इस संसार से विरक्ति का भाव मन में आ गया।
उपधान तप से
मिला बल
मुमुक्षू ने बताया कि वर्ष 2009 में उन्होंने जैन तीर्थ शत्रुंजय पाश्र्वनाथ में उपधान तप किया। उस दौरान 48 दिन के इस तप में साध्वी जैसी दिनचर्या का पालन किया। वहां अंकुरित हुआ धर्म की राह का पौधा डेढ़ वर्ष पहले तक वटवृक्ष बन गया। इंदौर के जानकीनगर में जैन साध्वी धैर्यनिधि का ससंघ चातुर्मास हुआ। साध्वी संघ से ज्ञानार्जन के बाद मन में संयम पथ पर अग्रसर होने की कामना को और पंख लग गए। उन्होंने अपनी इस इच्छा से परिजनों को अवगत कराया और सहमति मिलने के बाद तभी से वे उन्हीं के सान्निध्य में ज्ञानार्जन कर रही हैं।
ये हैं कंठस्थ
मुमुक्षू अमिता का पढ़ाई के प्रति लगाव निरंतर बना हुआ है। उन्हें जैन धर्म के पंच प्रतिक्रमण, नवस्मरण, चार प्रकरण, तीन भाष्य, तत्वार्थ सूत्र, वैराग्य शतक (अर्थ सहित) कंठस्थ हैं।
Published on:
18 Nov 2017 12:06 pm
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