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स्लोवेनिया की तकनीक से आईआईटी दूर करेगा गंगा से प्रदूषण

प्रदूषण और बाढ़ पर लगाम लगाने के लिए अपनाया जाएगा 3डी मॉडल राष्ट्रपति की मौजूदगी में सी-गंगा और स्लोवेनिया के बीच हुआ एमओयू

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Ganga through Slovenia's 3D model

स्लोवेनिया की तकनीक से आईआईटी दूर करेगा गंगा से प्रदूषण

कानपुर। केंद्र सरकार की ओर से गंगा को निर्मल बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। अब इस दिशा में स्लोवेनिया के वैज्ञानिकों की मदद से एक ऐसा थ्री डी मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे बाढ़ और प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके। यह मॉडल तैयार करने के लिए वहां की टेक्नोलॉजी का प्रयोग होगा। इस अनोखी पहल के लिए आईआईटी कानपुर के सी-गंगा और स्लोवेनिया दो एजेंसियों के बीच एमओयू हुआ है। समझौते के दौरान देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी मौजूद थे। जल्द ही दोनों देशों के वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने का काम शुरू कर देंगे।

आईआईटी चला रहा सी-गंगा प्रोजेक्ट
वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके बनने के बाद गंगा को अविरल व निर्मल बनाने के लिए कई तरह की योजनाएं बन सकती हैं, जो काफी कारगर साबित होंगी। आईआईटी लगातार टेक्नोलॉजी के जरिए गंगा को लेकर होने वाली दिक्कतों को दूर करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए संस्थान में सी-गंगा प्रोजेक्ट चल रहा है, यह प्रो. विनोद तारे की देखरेख में काम कर रहा। यहां के वैज्ञानिकों की टीम गंगा समेत सभी नदियों की स्पेस से मैपिंग कर रही थी मगर मानसून में बादलों के कारण यह संभव नहीं हो रहा था।

३डी मॉडल से रहेगी गंगा पर नजर
वहीं, स्लोवेनिया के सेटेलाइट के तहत रिमोट सेंसिंग के जरिए यह मुमकिन है। प्रो. तारे का कहना है कि स्लोवेनिया और सी-गंगा के बीच एमओयू हुआ है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ स्लोवेनिया के राष्ट्रपति व गंगा से जुड़े अन्य अधिकारी भी समझौते के गवाह बने। इसके तहत दोनों देशों के वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर 3डी मॉडल तैयार करेंगे। इसके माध्यम से गंगा को काफी करीब से देखा जा सकेगा।

चल रहे ये प्रोजेक्ट
नदियों में प्रदूषण पर नजर रखने के लिए कृत्सनम प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। यह नदियों में पानी की पल-पल की रिपोर्ट देता है। इससे प्रदूषण व सिंचाई संबंधित कार्यों में आसानी मिलेगी। तेलंगाना व कर्नाटक सरकार के बीच हुआ है समझौता। दूसरी ओर एक डिवाइस से भी प्रदूषण की जांच हो रही है। कानपुर आईआईटी के प्रो. बिशाख ने डिवाइस तैयार की है जिसे गंगा या अन्य नदियों में लगाकर प्रदूषण का स्तर मापा जा सकता है और जरूरी उपाय किए जा सकते हैं।