
band baja
उन्नाव. सहालग चालू हो गई। बैंड बाजा भी बजने लगा। लेकिन बैंड संचालकों में संशय व भय के बादल छाये है। अल्प आमदनी वाले बैंड संचालक अपने साथ दो दर्जन से ज्यादा बैंड बजाने वाले लोगों के परिवारों के पालन पोषण में सहायक हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश उनके रोजी-रोटी पर ग्रहण बनकर टूट पड़ा है। बैंड संचालक बीच का कोई रास्ता निकालने के लिए अधिकारियों की चौखट पर हाजिरी लगा रहा है। यही नहीं निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गुहार लगा रहा है।
जनप्रतिनिधि अधिकारी गणों से मिलकर बैंड बाजा के ऊपर सुप्रीम कोर्ट का आदेश ग्रहण बनकर टूटा रहा है। आदेश मैं ढीलाई देने का प्रयास का भरोसा तो विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों दे रहे है। लेकिन लिखित आदेश किसी की भी तरफ से नहीं आ रहा। जिससे बैंड बाजा संचालकों में भय व्याप्त है कि वह कब कानून के शिकंजे में फंस जाएं और एक झटके में बरसों की कमाई चली जाए। यदि एक भी मुकदमा बैंड संचालक के ऊपर हुआ तो हजारों परिवारों की रोजी रोटी छिनेगी। साथ ही इस हुनर को सीखने से भी लोग दूर भागेंगे।
साल में लगभग 50 साल के होती हैं
उन्नाव जिले के बैंड संचालक गण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति से बचने के लिए अधिकारियों के चौखट पर ठोकरें खा रहा है। बैंड संचालक अच्छे शाह ने बताया कि 4 फरवरी से सहालग शुरू हो गई है। बैंड बज भी रहे हैं। लेकिन अनुमति के लिए उन्हें और आयोजकों को काफी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। जिससे थक-हारकर आयोजक बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैंड बाजा बजाने की अनुमति के लिए सबसे पहले संबंधित चौकी इंचार्ज से परमिशन लेना पड़ता है। उसके बाद यह प्रक्रिया कोतवाली, लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, नगर मजिस्ट्रेट के पास आना पड़ता है। इतनी लंबी प्रक्रिया के दौरान आयोजक बैंड बाजा संचालक थक हार कर चूप चाप बैठ जाते हैं। कहीं लेखपाल नहीं मिलता है कहीं कानूनगो तो कहीं चौकी इंचार्ज। इसी संदर्भ में अच्छे शाह ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि आगामी 15 मई तक जो बुकिंग आदेश के पहले हो चुकी है। उनको बजाने की अनुमति दी।
एक साल की अनुमति देने की मांग
न्याय हित में सभी बैंड संचालक को इस बात की अनुमति दी जाए कि वह ट्राली में 4 हार्न व दो स्पीकर लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ पूरी तरह खड़े हैं। लेकिन हमें मानक के अनुरूप एक वर्ष के लिए लाइसेंस दिया जाए। जिससे उन लोगों की अनावश्यक दौड़-भाग बच सकें। अच्छे शाह ने बताया कि साल में 50 दिनों से ज्यादा सहालग नहीं होती है। इसके बाद भी उन लोगों को कानूनी दायरे में इस तरह से बांधा गया है कि इनकी रोजी-रोटी पर बनाई है। जिससे हजारों परिवार जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह इस बात को स्वीकार करते हैं कि रात 10:00 बजे के बाद कोई भी बैंड नहीं बजेगा। उन्होंने कहा इस संबंध में विधायक गणों ने आश्वासन दिया है कि बाजा वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन लिखित रूप से कहीं कुछ भी नहीं है। यदि शिकायत हुई तो कार्रवाई निश्चित है।
Published on:
06 Feb 2018 05:20 pm
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