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कन्नौज: पूर्व प्रधान को पीट-पीटकर मार डाला, मौजूदा प्रधान पर आरोप

कन्नौज में चुनावी रंजिश को लेकर पूर्व प्रधान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि वर्तमान प्रधान ने ही पूर्व प्रधान को मौत के घाट उतारा है।

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उत्तर प्रदेश के कन्नौज में नरुइया गांव के पूर्व प्रधान की पीट पीटकर हत्या कर दी गई। वर्तमान प्रधान और उसके समर्थकों पर हत्या का आरोप है। पूर्व प्रधान चुनाव हारने के बाद गांव के वर्तमान प्रधान के भ्रष्टाचार की पोल खोलने लगे थे। इससे नाराज होकर प्रधान और उनके लोगों ने बुधवार को गांव के पूर्व प्रधान अरुण शाक्य की घेर कर पिटाई कर दी। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

तालग्राम थाना छेत्र के नरुइया गांव में बुधवार को प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान में विवाद हो गया। इसमें बीजेपी कार्यकर्ता व पूर्व प्रधान अरुण शाक्य की मौत हो गई। पूर्व प्रधान के घरवालों का आरोप है कि उनकी लाठी-डंडो से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। अरुण शाक्य के परिजनों ने घटना के आरोप में प्रधान समेत अन्य छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।

MLA अर्चना पांडे का सपा पर आरोप
अरुण शाक्य पूर्व प्रधान होने के साथ बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। मामले की सूचना मिलते ही छिबरामऊ विधानसभा से बीजेपी विधायक अर्चना पांडे मौके पर पहुंची। वहां पहुंचकर उन्होंने मृतक के घरवालों को सांत्वना दी। उन्होंने इस घटना से सम्बंधित सीधा आरोप समाजवादी पार्टी और सपा कार्यकर्ताओं पर लगाया है। उन्होंने पुलिस को इस घटना में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या है पूरा मामला
गांववालों के मुताबिक, अरुण शाक्य गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में बोरिंग संबंधित कुछ काम करा रहे थे। इसी दौरान वर्तमान प्रधान की मौजूदा प्रधान से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। थोड़ी देर बाद कुछ और लोग मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। इस दौरान गंभीर चोट आने की वजह से पूर्व प्रधान अरुण शाक्य बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

क्या थी रंजिश
गांववालों के मुताबिक, पूर्व प्रधान अरुण शाक्य और मौजूदा प्रधान सरोजनी यादव के बीच पहले से चुनावी विवाद चल रहा था। अरुण शाक्य ने कुछ गांववालों के साथ मिलकर प्रधान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए DM से शिकायत कर दी थी। मामले की जांच होने के बाद प्रधान के वित्त अधिकार को सीज कर दिया गया था। उसके बाद गांव के विकास कार्यों के लिए तीन सदस्यों की समिति बनाई गई थी। उस समिति में पूर्व प्रधान भी एक सदस्य के तौर पर शामिल थे। इस बात से सरोजनी यादव गुस्सा थे।