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Good News: रेडिएशन तकनीक से विकसित हो रही जीरा-ईसबगोल की वैरायटियां

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय प्रदेश में फसलों को कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकने, फसलों को बीमारियों से बचाने व अधिक पैदावार वाली फसलों के लिए काम कर रहा है

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जोधपुर। आधुनिक समय में खेती भी तकनीक के मेल की जा रही है। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय प्रदेश में फसलों को कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकने, फसलों को बीमारियों से बचाने व अधिक पैदावार वाली फसलों के लिए काम कर रहा है। इसके लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय भाभा आणविक अनुसंधान संस्थान (बार्क) मुम्बई के साथ मिलकर रेडिएशन टेक्नोलॉजी से जीरा व ईसबगोल की नई किस्में विकसित करने पर शोध कर रहा है। जो अन्य तरीकों से विकसित किस्मों से ज्यादा कारगर होगी। विवि बार्क के साथ मिलकर जीरा, ईसबगोल, प्याज आदि सब्जियों और मसाला फसलों पर काम कर रहा है। समझौते के तहत बार्क और विवि मिलकर महत्वपूर्ण फसलों की उन्नतशील व रोगरोधी किस्मों पर काम शोध कर रहे हैं। जो पश्चिमी राजस्थान की जलवायु के तहत अधिक उपज और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पैदा करने में सक्षम होगी। बार्क के साथ यह करार करने वाला जोधपुर प्रदेश का पहला कृषि विवि है।

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म्यूटेशन ब्रीडिंग से बना रहे उपयोग वैरायटी
विवि के वैज्ञानिक बार्क के विशेषज्ञों के साथ मिलकर रेडिएशन से म्यूटेशन ब्रीङ्क्षडग से विभिन्न फसलों की उपयोगी वैरायटियां पैदा करने पर काम कर रहे है। ताकि उस फसल या पौधे का प्रारूप बदल जाए और एक नई वैरायटी उपल्बध होगी। इस शोध के बाद इस नई वैरायटी में बीमारी नहीं लगेगी व कम समय में यह अच्छी पैदावार देगी।

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इन पर भी किया काम, मिली सफलता
विवि बार्क के साथ रेडिएशन तकनीक से फसलों की नई वैरायटियां निकालने के लिए अन्य फसलों पर भी काम किया। इनमें सरसों की टीजेएम 1 व 2, गेहूं की टीएडब्ल्यू 153 आदि विकसित की है, इनसे निकट भविष्य में अच्छा पैदावार मिलने की उम्मीद है। विवि ने इन फसलों को अनुमोदित कराने के लिए स्टेट लेवल कमेटी को प्रस्ताव भेजा है।

बार्क के साथ जीरा-ईसब के रेडिएशन तकनीक से उत्पादन पर काम चल रहा है। उम्मीद है, शोध पूरा होने पर सफलता मिलेगी व किसानों को ज्यादा उपज देने वाली फसलें मिलेगी।
डॉ. एमएल मेहरिया, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर


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