
जोधपुर।
राजस्थान हाईकोर्ट की वृहद पीठ ने शनिवार को मास्टर प्लान से संबंधित याचिका पर अपना सुरक्षित रखा फैसला सुना दिया है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग, जस्टिस संगीत लोढा व जस्टिस अरुण भंसाली की बैंच ने कंम्पाउंडिंग नियम को सख्त बनाने का आदेश दिया है। इसके साथ कोर्ट ने अन्य निर्देशों को यथावत रखा है। यानि राजस्थान हाईकोर्ट के 12 जनवरी 2017 को दिए गए 35 दिशा निर्देश जारी रहेगें।
वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आवेदन को खारिज कर दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने साफ कर दिया कि भवन निर्माण बाइलॉज से ज्यादा को कंपाउंड नहीं किया जा सकेगा। अब मामले से संबंधित दूसरी जनहित याचिकाओं पर 4 फरवरी 2019 से खंडपीठ में सुनवाई होगी।
क्या है मामला
प्रदेश में मास्टर प्लान लागू करने में सरकार द्वारा अनियमितताएं बरतने व शहरों के ग्रीन बेल्ट व पेरिफेरल जोन सुरक्षित रखने के संबंध में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रसंंज्ञान लिया था। इस पर करीबन 13 साल सुनवाई करने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 12 जनवरी 2017 को 35 दिशा निर्देश जारी किए थे।
कोर्ट ने राज्य सरकार को इसकी पालना के लिए चार माह का समय देते हुए 22 जून 2017 को रिपोर्ट मांगी थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट ने वृहदपीठ का गठन कर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
13 साल चली सुनवाई
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने 7 अप्रैल 2004 को मेरे जयपुर का ये हाल, क्या होना था क्या हो गया शीर्षक से लेख के साथ एक पत्र राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा था। जिसको जनहित याचिका मानते हुए मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। सालों साल की जिरह सुनवाई और तर्क वितर्क सुनने के बाद 12 जनवरी 2017 को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश अरुण भंसाली की बेंच ने एतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने सही मायनों में जीवन जीने का आदेश देते हुए कहा था कि मास्टर प्लान की सख्ती से पालन होना चाहिए। उद्योग शहर ही परिधि के बाहर होने चाहिए।
14 जजों ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अनिल देव सिंह ने शुरू की। इसके बाद मामले की सुनवाई कर रहे 13 न्यायाधीशों ने सुनवाई की। इसमें कुल 17 वकील पैरवी कर चुके हैं जिसमें से चार वकील तो हाईकोर्ट में जज भी बन गए। इसके बाद कोर्ट ने 12 जनवरी को 257 पेज का विस्तृत फैसला दिया।
आखिर हो क्या रहा है
वृहद पीठ में सुनवाई के दौरान जेडीए ने जयपुर और कोटा की नियमन से जुड़ी कुछ फाइलें हाईकोर्ट में पेश की। एक फाइल को देखकर तो कोर्ट भी अंचभित रह गई। इस फाइल को जिस दिन नियमन की फाइल पेश की हुई उसी दिन जोन इंस्पेक्टर से लेकर जेडीसी तक सभी नोटशीट तैयार हो गई और नियमन का आदेश भी जारी हो गया।
सरकार का तर्क
वृहदपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट से एएसजी नरसिम्हन जोधपुर पहुंचे। जिन्होनें कहा कि छोटे शहरों में मास्टर प्लान के साथ ही जोनल व सेक्टर प्लान तैयार हो जाता है ऐसे में पूर्व में जारी कम्पाउंड प्रथा जारी रखा जाए और एक्ट के नियमों से ऊपर जाकर कोर्ट निर्देश जारी नहीं करें। साथ ही यह भी कहा कि वे किसी भी हालात में मास्टर प्लान के खिलाफ कम्पाउंड नहीं करने जा रहे। नगर पालिका एक्ट व जेडीए एक्ट के नियमों के ऊपर जा कर कोर्ट निर्देश जारी नहीं करें।
नरसिम्हन ने उणियारा व नोखा जैसे कस्बों के नक्शे वृहद पीठ के समक्ष पेश करते हुए कहा कि इन शहरों में मास्टर प्लान के साथ ही जोनल व सेक्टर प्लान भी बना दिए जाते हैं, जैसे पार्क अस्पताल मार्केट, मंडी कॉलोनी आदि। उन्होंने कहा कि वैसे जयपुर के जोनल प्लान बना दिए गए हैं, अब जोधपुर व अजमेर के भी बना दिए जाएंगे। नरसिम्हन ने कहा कि कोर्ट ने 40 से अधिक निर्देश जारी कर दिए हैं, उनकी पालना कैसे की जाए।
Published on:
15 Dec 2018 11:27 am
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