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संचार क्रांति के बावजूद बही का क्रेज आज भी वही

कम्प्यूटर, इंटरनेट, ऑन लाइन खरीदारी का प्रचलन के बढऩे के बावजूद लेन देन का हिसाब रखने वाले परम्परागत बही खाते का क्रेज आज भी बरकरार है। दीपावली पर परम्परागत रूप से बही खातों पर पूजन कर नई बहियां रखने का रिवाज है। दीपावली को परम्परागत पूजन भी बहियों का होता है ना कि कम्प्यूटर अथवा लेपटॉप का।

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jodhpur people maintain bahi khata in modern times

संचार क्रांति के बावजूद बही का क्रेज आज भी वही

जोधपुर. कम्प्यूटर, इंटरनेट, ऑन लाइन खरीदारी का प्रचलन के बढऩे के बावजूद लेन देन का हिसाब रखने वाले परम्परागत बही खाते का क्रेज आज भी बरकरार है। दीपावली पर परम्परागत रूप से बही खातों पर पूजन कर नई बहियां रखने का रिवाज है। दीपावली को परम्परागत पूजन भी बहियों का होता है ना कि कम्प्यूटर अथवा लेपटॉप का। कारोबार छोटा या हो बड़ा इससे संबंधित हर क्षेत्र में कम्प्यूटर की महत्ता बढ़ी जरूर है लेकिन कम्प्यूटर की तमाम सुविधाओं के बावजूद दशकों पुरानी बही खाता प्रणाली की गुडविल आज भी बरकरार है।

लक्ष्मी पूजन के समय बही खातों पर स्वास्तिक बनाकर विधिवत पूजन कर नया खाता शुरू करना व्यापार के लिए शुभ माना जाता है। बही खातों में दर्ज लेन देन अब भी मान्य है। बही लेखन एक परम्परा के साथ कला भी है। इस कला को जीवित रखने के लिए बही निर्माता व रूचि रखने वाले प्रतिबद्ध है। दिवाली पर शुभ मुहूर्त में बहियों में लेखा प्रारंभ व्यापारी की प्रथम प्राथमिकता होती है।

उद्योग व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कम्प्यूटर के बावजूद बहियों में लेखन आज भी बदस्तूर जारी है। कपड़ा बाजार सिटी पुलिस स्थित प्रतिष्ठान के संचालक एलसी मेड़तिया ने बताया कि कम्प्यूटर क्रांति के बाद बिक्री में कुछ प्रतिशत फर्क जरूर आया लेकिन बहियों की मांग आज भी बरकरार है।