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video : जोधपुर पहुंचा पानी, पीएचईडी के अधिकारियों ने की पूजा

पैंसठ दिन की नहरबंदी के बाद इंदिरा गांधी कैनाल का पानी जोधपुर पहुंच गया। नहर की मरम्मत और साफ-सफाई के चलते पानी तय समय से आठ घंटे पहले ही गुरुवार आधी रात बाद पहुंच गया। हाथी नहर पर शुक्रवार सुबह जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल पूजन किया।

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नहरबंदी के दौरान इस पर नहीं चलाने पड़े वाटर टैंकर, अब शटडाउन भी नहीं

जोधपुर. पैंसठ दिन की नहरबंदी के बाद इंदिरा गांधी कैनाल का पानी जोधपुर पहुंच गया। नहर की मरम्मत और साफ-सफाई के चलते पानी तय समय से आठ घंटे पहले ही गुरुवार आधी रात बाद पहुंच गया। हाथी नहर पर शुक्रवार सुबह जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल पूजन किया। नहरबंदी के दौरान पहली बार शहर को पेयजल किल्लत नहीं झेलनी पड़ी। यही नहीं, प्रदेश की राजधानी जयपुर समेत 16 शहरों में पीने के पानी के लिए वाटर टैंकर चलाने पड़े, लेकिन सूर्यनगरी में पानी की कोई कमी नहीं रही। कुशल जल प्रबंधन से प्रफुल्लित जलदाय विभाग अब जलापूर्ति में कटौती भी नहीं करेगा।
हाथी नहर पर शुक्रवार सुबह पीएचईडी के चीफ इंजीनियर नीरज माथुर, एडिशनल चीफ इंजीनियर नक्षत्र सिंह तथा अन्य अधिकारियों ने विधि-विधान सेजल पूजन किया। इस माैक पर हाथी नहर में पानी की आवक देखने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के साथ कई लोग पहुंचे। गुरुवार रात पानी पह़ुंचने तक अधिकारी सतत निगरानी में जुटे रहे। नहरबंदी के बाद पानी पहुंचा, तब कायलाना में 51 फुट पानी भरा हुआ था। आमतौर पर नहरबंदी के दौरान कायलाना भी सूखने की स्थिति में पहुंच जाता था। हाथी नहर भी पूरी तरह सूख जाती थी।

माथुर को सौंपा समन्वय
इंदिरा गांधी नहर बंदी के दौरान उत्पन्न स्थिति का सामना करने के लिए चीफ इंजीनियर नीरज माथुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी तथा एसीएस सुबोध अग्रवाल से वे सतत संपर्क में रहे। इंदिरा गांधी नहर पर दस जिलों की आबादी निर्भर है।

अधिकारियों की पीठ थपथपाई
हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर के दौरे पर आए थे, तब पीएचईडी के अधिकारियों से जल प्रबंधन को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने अधिकारियों की पीठ थपथपाते हुए कहा था कि जोधपुर ही तरह की समूचे प्रदेश में पेयजल व्यवस्था होनी चाहिए। प्रदेश में कहीं भी पेयजल किल्लत की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े।
एक्सपर्ट ऑपिनियन

जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग अपने बेहतर जल प्रबंधन के चलते पूरी तरह आश्वस्त था कि नहरबंदी के दौरान इस बार पीने के पानी के लिए टैंकर नहीं चलाने पड़ेंगे। ऐसा पहली बार हुआ कि नहरबंदी के बाद पानी जोधपुर पहुंच गया और कायलाना-तख्तसागर और सुरपुरा बांध भी लबालब है। शहर में वाटर टैंकर नहीं चलाने पड़े। अब शटडाउन भी नहीं लेंगे। पानी को लेकर आम लोग भी सजग रहेंगे और व्यर्थ नहीं बहाएंगे तो शहर में कभी भी पेयजल संकट नहीं झेलना पड़ेगा। चीफ इंजीनियर नीरज माथुर के नेतृत्व में पीएचईडी की टीम पोडिंग सिस्टम में जल संग्रहण, शटडाउन से जल बचत और छीजत रोककर बूंद-बूंद पानी के इस्तेमाल की कार्ययोजना पर समर्पण और निष्ठा से अमल का ही सुखद परिणाम रहा कि नहरबंदी के दाैरान शहर को पेयजल किल्लत नहीं झेलनी पड़ी।
– प्रकाश बाफना, अधिशासी अभियंता, पीएचईडी