1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जंगे आजादी के सिपाही बिस्सा ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी घर से

जोधपुर के प्रमुख चौराहे जालोरीगेट पर लगी है उनकी मूर्ति

3 min read
Google source verification
जंगे आजादी के सिपाही बिस्सा ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी घर से

जंगे आजादी के सिपाही बिस्सा ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी घर से

जोधपुर. जोधपुर में जंगे आजादी के सिपाही बालमुकुंद बिस्सा पर महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने प्रतिज्ञा की कि आजीवन खद्दर धारण करूंगा और पूरा जीवन देश सेवा में बिताऊंगा । यह कहना है जोधपुर के चर्चित स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा के पौत्र सुरेश बिस्सा का । पत्रिका से बातचीत में बिस्सा ने बताया कि उन्हें दादा के साथ वक्त बिताने का मौका तो नहीं मिला , लेकिन पिताजी, बुआ ,परिवार के बड़े चाचा आदि के माध्यम से जंगे आजादी के किस्सों में दादाजी की मधुर स्मृतियां आज भी कायम है । दादाजी को स्वदेशी से इतना प्रेम था कि उन्होंने सर्वप्रथम घर परिवार के विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर इसकी शुरुआत घर से की । जयनारायण व्यास के नेतृत्व में 1940 के आंदोलन के दौरान जवाहर खादी भंडार नाम से मुख्य बाजार में एक दुकान शुरू की । दादाजी की दुकान स्वायत्तशासी आंदोलन की गतिविधियों का केन्द्र बन गई । तत्कालीन सरकार की दृष्टि में खादी धारण करना और बेचना अनुचित कार्य होने के कारण पुलिस की नजर रहने लगी । वर्ष 1942 के प्रारंभ में जब जयनारायण व्यास के नेतृत्व में लोक परिषद ने जोधपुर सरकार से जागीरी अत्याचारों का अंत एवं उत्तरदायी शासन स्थापना की मांग की । जब 26 मई 1942 को जयनारायण व्यास सहित 41 स्वतंत्रता सेनानियों अनिश्चितकाल के लिए जेल में बंद कर दिया गया । जेल में अमानवीय व्यवहार और खराब भोजन के विरोध में 10 जून 1942 को भूख हड़ताल और आमरण अनशन से बालमुकुंद बिस्सा की हालत बिगड़ गई । उन्हें परिजनों से नहीं मिलने दिया । आखिरकार 19 जून 1942 को विंडम अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया । उनकी अंतिम यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही । जोधपुर के प्रमुख चौराहे जालोरीगेट सर्किल पर उनकी मूर्ति लगी है।

जोधपुर में की थी खादी संघ की स्थापना

वर्ष 1908 में डीडवाना तहसील के गांव मंडूकणा में एक साधारण पुष्करणा ब्राह्मण परिवार में जन्में बालमुकुंद बिस्सा की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में हुई। बंगाल के क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों के संपर्क में आने से बिस्साजी में देशभक्ति की भावना जाग्रत हुई। सन् 1934 में वे जोधपुर चले आए। राजस्थान चरखा संघ से खादी की एजेन्सी लेकर खादी संघ की स्थापना की।

दुकान जो बनी देशभक्तों के मिलने का केन्द्र

बिस्सा ने शहर के मुख्य गांधी बाजार में खादी की दुकान लगाई जो देशभक्तों के मिलने का केन्द्र बना। सही मायने में बिस्साजी एक रचनात्मक संदेशवाहक थे और खादी भंडार एक समन्वय सम्पर्क केन्द्र था जहां सभी प्रकार की राजनैतिक गतिविधियो की सूचना प्राप्त हो जाती थी। उस जमाने में खादी को राज्य सरकार की नजरों में राजद्रोही माना जाता।

सेन्ट्रल जेल में भूख हडताल

उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए जयनारायण व्यास के नेतृत्व में 26 मई 1942 को सत्याग्रहियों का जेल भरो आंदोलन तीव्र गति से प्रारंभ हुंआ तब भारत रक्षा कानून के अन्तर्गत मारवाड लोक परिषद के आंदोलन में बालमुकुंद बिस्सा को गिरफ्तार कर जोधपुर सेंट्रल जेल में नजरबंद कर दिया गया। सेन्ट्रल जेल में उन्होंने भूख हडताल आरंभ कर दी। इस दौरान जेल में उनका स्वास्थ्य गिरने लगा और लू का प्रकोप हो गया। जेल अधिकारियों की ओर से समूचित चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से 18 जून 1992 को उनका रक्तचाप गिरने लगा । खराब स्थिति को देखते हुए विण्डम हॉस्पीटल (वर्तमान में महात्मा गांधी अस्पताल) भेजा वहां पर पुलिस के पहरे में नजरबंद राजनैतिक बंदी का दुखद निधन हो गया। बिस्सा के परिजन गोल्डी बिस्सा ने बताया कि बालमुकुंद बिस्सा स्मृति संस्था का गठन 1993 में किया गया जो हर साल 15 अगस्त 26 जनवरी को और 19 जून को बालमुकुंद बिस्सा की याद में सेवा दिवस मनाती है।