
जेल आइजी विक्रमसिंह
जोधपुर.
अजमेर की घूघरा घाटी के बाद अब फलोदी में भी हाई सिक्योरिटी जेल बनेगी। यह जेल नो नेटवर्क क्षेत्र में होगी। इसमें हार्डकोर व हिस्ट्रीशीट बदमाशों को ही बंद रखा जाएगा। इसके साथ ही शहर के बीचों-बीच मौजूद जेलोें को भी बाहर शिफ्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही बंदियों को कोर्ट ले जाने की बजाय जेल में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मार्फत सुनवाई की जाएगी।
पुलिस महानिरीक्षक (जेल) विक्रमसिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। वे गत 30 जनवरी को तलाशी लेने जेल पहुंचे आइपीएस हेमंत कलाल व उपखण्ड मजिस्ट्रेट को गेट पर रोकने के मामले की जांच करने आए जोधपुर जेल आए थे।
आइजी विक्रम सिंह ने कहा कि राज्य की 25 जेलों में मोबाइल उपयोग में लेने की शिकायतें मिल रही हैं। इनकी रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। डीजी ने जेल कार्मिकों के साथ ही आमजन के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की है। जेल में किसी बंदी के पास मोबाइल या आपत्तिजनक सामग्री की सूचना देने या पकड़वाने वाले को इनाम या पदोन्नति दी जाएगी। इसमें लिप्त पाए जाने पर जेल कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। राज्य सरकार फलोदी में हाई सिक्योरिटी जेल बनाने पर विचार कर रही है। यह जेल नो नेटवर्क जोन में होगी।
बंदियों को सुनवाई के लिए जेल से कोर्ट ले जाना और वापस जेल लाया जाता है। इससे बचने के लिए जेल में ही वीसी के मार्फत सुनवाई के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए वर्तमान में जेल में एक ही नोड है। तीन चरण में 12 सौ नोड्स लगाए जाएंगे। पहले चरण में चार सौ नोड्स लगाने की योजना र्है। ताकि बंदियों को कोर्ट लाने ले जाने से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि शहर के बीच मौजूद जेलों को बाहर शिफ्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने बताया कि आइपीएस हेमंत कलाल व अन्य को तलाशी से रोकने संबंधी शिकायत की जांच करने आइजी विक्रमसिंह जोधपुर आए हैं। उन्होंने जेल में प्रहरी व कार्मिकों के बयान लिए। तत्पश्चात सम्पर्क सभा लेकर सभी की हौंसला अफजाई की। मोबाइल व अन्य निषेध सामग्री जेल में न आने देने के लिए आवश्यक निर्देश देकर हौंसला अफजाई भी की।
Published on:
01 Apr 2025 11:26 pm
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