
प्रत्याशियों के साथ कई दिग्गजों की भी प्रतिष्ठा दांव पर
Rajasthan assembly election 2023 : जिले की सातों विधानसभा सीटों पर चुनावी रण में उतरे 71 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तीन दिसंबर को होगा। लेकिन जिले की सातों विधानसभा सीटों पर कुछ ऐसे भी प्रत्याशी हैं जिनका राजनीतिक भविष्य तय होगा। कई प्रत्याशी के लिए चुनाव हारना जंग हारने जैसा होगा। पांच साल बाद किसी के उम्र आड़े आएगी तो किसी से पार्टी किनारा कर सकती है। प्रत्याशियों के साथ उनसे जुड़े बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।
कांग्रेस :
झुंझुनूं विधानसभा : तीन बार के विधायक बृजेंद्र ओला मैदान में हैं। पार्टी इनपर लगातार भरोसा करते हुए टिकट दे रही है। ओला 70 वर्ष के हो चुके हैं।
नवलगढ़ विधानसभा : तीन बार से विधायक्र राजकुमार शर्मा इस बार भी चुनावी मैदान में हैं। अगर इन्हें जीत मिलती है तो पार्टी में उनका कद बढेगा।
मंडावा विधानसभा : यहां से रीटा चौधरी को पार्टी ने मैदान में उतारा। पिछली बार विधानसभा चुनावों में हार गई थी। इसके बार लोकसभा चुनावों में सांसद नरेंद्र खींचड़ के सीट छोडऩे के बाद हुए उप चुनाव में जीत मिली। सांसद को हरा दिया तो पार्टी में कद बढ़ेगा।
पिलानी विधानसभा : पार्टी ने यहां से विधायक जेपी चंदेलिया का टिकट काटकर शिक्षा विभाग के अधिकारी रह चुके पितराम काला को मैदान में उतारा है। पितराम काला पहली बार चुनावी मैदान में है। ऐसे में पार्टी को इनसे जीत की उम्मीद ज्यादा है।
खेतड़ी विधानसभा: यहां से पार्टी ने पूर्व मंत्री, मुख्यमंत्री के सलाहकार व विधायक डॉ. जितेंद्रसिंह का टिकट काटकर नए चेहरे मनीषा गुर्जर पर भरोसा जताया है। अगर हार का सामना करना पड़ा तो अगली बार टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है।
भारतीय जनता पार्टी :
झुंझुनूं विधानसभा : इस सीट से पार्टी ने इस बार निषित कुमार उर्फ बबलू चौधरी भरोसा जताया है। पिछले विधानसभा चुनाव में निषित बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में थे। जबकि पार्टी ने इस बार पिछले चुनाव के प्रत्याशी राजेंद्र भाम्बू का टिकट काट कर बबलू को मैदान में उतारा है।
सूरजगढ़ विधानसभा : यहां से पार्टी ने पूर्व सांसद और विधायक रही संतोष अहलावत पर भरोसा जताते हुए टिकट दिया। पार्टी ने यहां से विधायक रह चुके सुभाष पूनियां का टिकट काट दिया।
मंडावा विधानसभा : विधानसभा से पिछली बार विधायक और फिर लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने नरेंद्र खींचड़ को मौका दिया। जीते तो इनका पार्टी में कद और बढेगा।
पिलानी विधानसभा : पार्टी ने इस बार पिलानी विधानसभा सीट से इस बार नए चेहरे राजेश दहिया पर दांव खेला है। जीत मिलने पर पार्टी का भरोसा इन पर बढ़ जाएगा। अगर हार हुई तो पार्टी यहां आगामी विधानसभा चुनाव में नए चेहरे की तलाश कर सकती है।
खेतड़ी विधानसभा : पार्टी ने खेतड़ी विधानसभा से इस बार भी धर्मपाल गुर्जर पर विश्वास को कायम रखा है। पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने इन्हें इस बार मौका दिया है। अगर यह चुनाव हार जाते हैं तो फिर से टिकट मिलने की उनकी डगर मुश्किल हो सकती है।
नवलगढ़ विधानसभा : यहां से पार्टी ने विक्रम जाखल पर भरोसा जताते हुए टिकट देकर मैदान में उतारा है। जाखल पिछली बार बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। परंतु उन्हें हार का सामाना करना पड़ा था। इस बार अगर ये चुनाव जीत जाते हैं तो इन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मौका मिलने की उम्मीदें बढ़ सकती हैँ।
अन्य
: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रासिंह चुनावी मैदान में तो नहीं हैं। लेकिन इस बार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र भांबू का समर्थन किया। सुमित्रासिंह प्रत्याशी की कई सभा व रैलियों में नजर आई।
उदयपुरवाटी विधानसभा : विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने इस बार शिवसेना से चुनाव लड़ा है। उदयपुरवाटी में इस बार हुए त्रिकोणीय मुकाबले के चलते इनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। पिछली बार राजेंद्र गुढ़ा बसपा से चुनाव लड़कर विधायक बने थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।
Published on:
28 Nov 2023 01:57 pm
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