गागरोन रेंज में अभी सुनाई नहीं देगी दहाड़-
झालावाड़ जिले की सीमा में अभी बाघ की दहाड़ सुनाई देगी। गागरोन रेंज में बाघ नहीं आ सकेगा। इस रेंज में मशालपुरा, लक्ष्मीपुरा, प्रेमपुरा, नौलाव, राजपुरा सहित करीब एक दर्जन गांव भी है जिनका विस्थापन किया जाना है लेकिन यह लंबी प्रक्रिया है। इसके लिए नौलाव व गागरोन मे वन विभाग की ओर से चौकी की स्थापना की जा चुकी है। इस क्षेत्र में भी विभाग की तैयारी पूरी है। गांव लक्ष्मीपुरा निवासी ज्ञानसिंह गुर्जर व सुरेश गुर्जर ने बताया कि हमें अभी तक कोई सूचना नहीं है और विस्थापन के लिए अभी तक हमें वन विभाग की ओर से कोई नोटिस नहीं दिए गए हंै। उन्होंने बताया कि सही स्थान व खेती के लिए उचित जगह मिलने पर ही हम गांव खाली करेंगे।
माताजी का मंदिर बनेगा टूरिस्ट पाइंट-
जिस प्रकार रणथ?भौर नेशनल पार्क में प्रवेश करने से पहले गणेश मंदिर में श्रद्धालु व पर्यटक दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं, उसी प्रकार मुकंदरा की दरा रेंज में स्थित माताजी के मंदिर भी बाघ देखने आने वालों के लिए ट्रिस्ट पाइंट बन जाएगा। गांव से करीब ६ किलोमीटर दूर वन क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित घाटी की माताजी का मंदिर पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए पहाड़ी काटकर अलग से रास्ता बनाया जा रहा है ताकि यात्रियों का जंगल में दखल न हो और वे सुरक्षित भी रह सके। पर्यटक पहाड़ी के इस रास्ते से नीचे तलहटी में विचरण करते टाईगर व अन्य वन्य जीवों को आराम से देख सकेंगे।
सुरक्षा के नाम पर केवल डंडा-
मुकंदरा हिल्स नेशनल पार्क में वन विभाग की ओर से क्षेत्र में बाघ लाने की तैयारी तो विभाग ने कर ली, लेकिन सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण आदि उपलब्ध कराने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। वर्तमान में गार्ड केवल डंडे के बल पर गश्त करते हैं। सुरक्षाकमिर्यो को बाइक, जीप, रायफल, जैकेट, ल?बे जूते, हेलमेट आदि की आवश्यकता होगी। दरा वन रेंज के वनपाल रामनरेश मीणा ने बताया कि बाघ आने के बाद विभाग की ओर से गार्डों को सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाए जाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल तो मात्र एक बाइक से ही पूरे क्षेत्र का सभालते हैं।
यह कहना है कि अधिकारियों का
मुकंदरा हिल्स नेशनल पार्क के उपवन संरक्षक, टी.मोहनराज ने बताया कि वन विभाग की ओर से मुकंदरा हिल्स नेशनल पार्क में बाघ लाने की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही है। बोराबास व दरा रेंज में इसके लिए क्लोजर बनाए गए हैं। बोराबास में चार व दरा में 28 हैक्टेयर में फैंसिंग कराई जा रही है। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। फिलहाल केवल दो गांवों के विस्थापन किया जा रहा है, जैसे-जैसे बजट मिलता जाएगा, विस्तार भी होता रहेगा।
रिपोर्ट -जगदीश परालिया,झालावाड़