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जिले में मजदूरों को सरकारी दर से कम मिल रही मजदूरी, किसान संगठन ने उठाई आवाज

स्थानीय मजदूरों को दरकिनार कर मेघनगर ओद्यौगिक इकाइयां बाहर के मजदूरों को दे रही रोजगार

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झाबुआ

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Binod Singh

Oct 12, 2022

जिले में मजदूरों को सरकारी दर से कम मिल रही मजदूरी, किसान संगठन ने उठाई आवाज

जिले में मजदूरों को सरकारी दर से कम मिल रही मजदूरी, किसान संगठन ने उठाई आवाज

झाबुआ. जिले के मजदूरों को जिले में काम नहीं मिल रहा है, इनके स्थान पर दूसरे राज्यों के लोगों को काम दिया जा रहा है। इक्का-दुक्का लोगों को जो रोजगार मिल रहा है, उसमें भी शासन द्वारा तय मानक से मजदूरी नहीं दी जा रही है।औद्योगिक इकाइयां जिले में चल रही है और आसपास के मजदूर काम नहीं मिलने से अन्य जिलों में रोजगार ढूंढने को मजबूर हो रहे हैं। जिला प्रशासन का भी इस ओर ध्यान नहीं है। तमाम मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता परमजीत ङ्क्षसह ने बताया कि जिले मजदूरों के साथ मेघनगर तहसील में स्थित दर्जनों औद्योगिक इकाइयों द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इस संबंध में 5 सितंबर तथा 23 सितंबर को दो रैलियां आयोजित कर मजदूरों के हित की बात जिला प्रशासन से की गई थी। उस दौरान मेघनगर एसडीएम अंकिता प्रजापति के द्वारा लेबर विभाग के साथ बैठक करने की बात कही गई थी।
बैठक में समस्याओं पर चर्चा
सोमवार को मेघनगर तहसील सभागार में बैठक का आयोजन किया गया। यहां एसडीएम अनुपस्थित रही, तहसीलदार , उप तहसीलदार और लेबर विभाग के इंस्पेक्टर संजय कनेश के साथ मजदूरों की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय किसान संगठन की ओर से प्रदेश प्रवक्ता परमजीत ङ्क्षसह ,जिला अध्यक्ष अमरू मोहनिया ,जिला उपाध्यक्ष रमन परमार, जिला मंत्री कालू ,मेघनगर तहसील अध्यक्ष दीता भूरिया, मेघनगर तहसील महामंत्री कैलाश वसुनिया, झाबुआ तहसील अध्यक्ष मोर ङ्क्षसह , जिला कोषाध्यक्ष नानू बारिया शामिल हुए। बैठक में तीन ङ्क्षबदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें किसान संगठन ने जिले के औद्योगिक इकाइयों में न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देने की बात कही।
मजदूरों को लेकर अधिकारियों के पास नहीं है जानकारी
किसान संगठन जिला अध्यक्ष मोहनिया ने बताया कि तीनों मुद्दों पर अधिकारियों की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।यहां तक की अधिकारी न्यूनतम मजदूरी किस आधार पर तय की जा रही है यह भी नहीं बता सके। जिले में संचालित होने वाली औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों को लेकर भी किसी भी प्रकार का डाटा विभाग के पास उपलब्ध नहीं था। लेबर विभाग के इंस्पेक्टर ने बताया कि कंपनियों में ठेका प्रथा को खत्म करने अथॉरिटी विभाग के पास नहीं है। कुल मिलाकर बातचीत का कोई नतीजा सामने नहीं आया।