
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ अस्तित्व के लिए जूझ रहा शहर का छोटा तालाब
झाबुआ. सरकारी राशि में किस तरह से भ्रष्टाचार किया जाता है यह देखना है तो शहर का छोटे तालाब इसका अच्छा उदाहरण है। इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर नियम विरुद्ध 1.33 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद न तो तालाब की गंदगी साफ हो पाई और न ही आसपास के घरों का गंदा पानी तालाब में मिलना बंद हुआ। किनारे पर बनाए गए पाथ वे पर मवेशी बांधे जा रहे हैं। दरअसल छोटे तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए खर्च करना थे 82 लाख 87 हजार 500 रुपए और नगर पालिका ने खर्च किए 1 करोड़ 33 लाख 20 हजार 773 रुपए। यानी 50 लाख 33 हजार 273 रुपए अतिरिक्त । यही नहीं, ठेकेदार ने डीपीआर के अनुरूप काम किए बिना ही अधिकारियों से सांठगांठ कर फर्जी बिल लगाकर ज्यादा राशि निकाल ली। जब जांच हुई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसमें तत्कालीन कलेक्टर और उस वक्त के नगर पालिका प्रशासक आशीष सक्सेना के साथ ही दो नगर पालिका अध्यक्ष भाजपा के धनङ्क्षसह बारिया और कांग्रेस की मन्नूबेन डोडियार तथा दो तत्कालीन सीएमओ एमआर निगवाल व एलएस डोडिया, तत्कालीन लेखापाल पंकज गौड़, और सब इंजीनियर नीलम भंवर,कमलकांत जोशी, सुरेश गणावा तथा धीरेंद्र रावत की भूमिका सामने आई।ये पूरी रिपोर्ट आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल को भेजी गई है।
-2015 में स्वीकृत हुई थी योजना
शासन ने झील व जलाशय संरक्षण योजना के तहत वर्ष 2015 में शहर के बहादुर सागर तालाब और छोटे तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए कुल 528.94 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें से छोटे तालाब के लिए 194.76 लाख रुपए और बहादुर सागर तालाब के लिए 334.18 लाख रुपए का प्रावधान किया गया था।
-इस तरह की गई गड़बड़
शासन ने बहादुर सागर तालाब और छोटे तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपए आवंटित किए। यह राज्यांश था और इसमें 59 लाख 40 हजार रुपए निकाय अंश जोडऩा था। इस कुल राशि में से छोटे तालाब के सौंदर्यीकरण पर 82 लाख 87 हजार 500 रुपए और बहादुर सागर तालाब के सौंदर्यीकरण पर 1 करोड़ 41 लाख 97 हजार 500 रुपए खर्च किए जाने थे। नगर पालिका ने इसके उलट बहादुर सागर तालाब के सौंदर्यीकरण की राशि का उपयोग भी छोटे तालाब में कर लिया। खास बात ये हैं कि जितनी राशि खर्च करना बताई गई, धरातल पर उतना काम हुआ ही नहीं। 18 ऐसे कार्य है जो नहीं हुए, जबकि कुछ काम अधूरे ही पड़े हैं।
लोकायुक्त में ले जाऊंगा प्रकरण
मेरी ही शिकायत पर पूरी जांच हुई है। चूंकि इस घोटाले में कई बड़े नाम जुड़े हैं, इसलिए हो सकता है कि मामले को दबा दिया जाए। इसलिए अब इस प्रकरण को न्यायालय के माध्यम से लोकायुक्त को प्रेषित करने का निवेदन करूंगा। ताकि शहर की धरोहर को बदहाली की और धकेलने वालों को सजा मिल सके।
-जितेंद्र ङ्क्षसह राठौर, समाजसेवी, झाबुआ
अमृत 2.0 में छोटे तालाब को शामिल किया है
छोटे तालाब को अमृत 2.0 में शामिल किया गया है। पूर्व में जो भी गड़बड़ी हुई थी उसकी जांच हो चुकी है। रिपोर्ट भी शासन को भेजी जा चुकी है। हमारा लक्ष्य तालाब का सौंदर्यीकरण करना है। उसी लक्ष्य के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।
-कविता ङ्क्षसगार, नपाध्यक्ष, झाबुआ
Published on:
12 Jul 2023 08:55 pm
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