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हिन्दू-मुस्लिम के आस्था का केंद्र है राजस्थान का यह चमत्कारी स्थान

Ramdevra Fair 2019: Ramdevra Fair 2019: पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा गांव में बाबा रामदेव के मेले को लेकर बाबा रामदेव की समाधि समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई है।

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जैसलमेर। Ramdevra Fair 2019: पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा गांव में बाबा रामदेव के मेले ( Baba Ramdev fair in Rajasthan ) को लेकर बाबा रामदेव की समाधि समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई है।

एक सितम्बर से समाधि पर अभिषेक और ध्वजारोहण के साथ बाबा रामदेव का 635वां अंतरप्रांतीय मेला शुरू होगा। मेले के दौरान मंदिर को अलसुबह 3 बजे खोला जाएगा, जो देर रात 12 बजे तक ( Ramdevra Temple Timings ) खुला रहेगा।

बाबा रामदेव ( Baba Ramdev Temple Rajasthan ) ने जाति, धर्म, सम्प्रदाय, ऊंच नीच, अमीरी-गरीबी का भेद मिटाकर सबको मानवता, भाईचारे एवं समानता का संदेश दिया था। इसीलिए उस महापुरुष को लाखों हिन्दू बाबा रामदेव तथा मुसलमान बाबा रामसा पीर के नाम से एक लोकदेवता के रूप में श्रद्धा के साथ उनकी समाधि पर शीश नवाकर अपने जीवन को धन्य करते है।

पोकरण उपखण्ड मुख्यालय से करीब 12 किमी उत्तर की तरफ विख्यात गांव रामदेवरा स्थित है। जिसका दूसरा नाम रुणीचा ( Runicha Dham Rajasthan ) भी है। यहां साम्प्रदायिक एकता के प्रतीक मध्यकालीन लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि पर भव्य मंदिर बना हुआ है। बाबा के नाम से प्रसिद्ध रामदेव मंदिर व यहां की बावड़ी अपने चमत्कारों से देशभर में प्रसिद्ध है।

बाबा रामेदव ( Baba Ramdev Runicha ) के इस पवित्र धाम पर प्रतिवर्ष लगने वाले अंतरप्रांतीय मेले में राजस्थान सहित गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, मद्रास, बिहार, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली आदि से लाखों यात्री यहां आकर बाबा की समाधि के दर्शन करते हैं।

बाबा के चमत्कारों पर विश्वास रखने वालों की मान्यता है कि बाबा की समाधि ( Baba Ramdevpir Samadhi ) के दर्शन करने पर जीवन की सभी मन्नतें पूरी होती है और बाबा सभी की मनोवांछित फल मिलता है। यही कारण है कि बाबा के दर्शनार्थ रामदेव आने वालों की संख्यां में दिन-ब-दिन बढ़ोतरी ही हो रही है।

मान्यता है कि पश्चिमी राजस्थान को बाबा ना कैवल भैरव राक्षस से मुक्ति दिलाई, वरन उन्होंने दलितों के उद्धार के कार्य भी आगे आकर किए। जिसके लिए उन्हें अपने ही परिवार का विरोध झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने चमत्कारों से निचले तबके के लोगों के उद्धार में अहम भूमिका निभाकर समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया।