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जैसलमेर जिले में 6 नई पंचायत समितियों और 56 ग्राम पंचायतों का प्रस्ताव

सीमावर्ती और आकार के लिहाज से प्रदेश के सबसे बड़े जैसलमेर जिले में पंचायत समितियों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नवसृजन की प्रक्रिया का पहला चरण संपन्न हो गया है।

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सीमावर्ती और आकार के लिहाज से प्रदेश के सबसे बड़े जैसलमेर जिले में पंचायत समितियों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नवसृजन की प्रक्रिया का पहला चरण संपन्न हो गया है। जिले में नई 6 पंचायत समितियों और 56 ग्राम पंचायतों का सृजन किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। जिला कलक्टर प्रतापसिंह ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी की। आमजन आगामी 6 मई तक इस पर अपनी आपत्तियां संबंधित उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और कलक्टर कार्यालय में दर्ज करवा सकेंगे। जिले में नई पंचायत समितियों के गठन को लेकर लोगों में बेहद उत्सुकता देखी गई। प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर विचार-विमर्श का दौर निरंतर चलता रहा और मंगलवार को सूचियां सामने आई। गौरतलब है कि जिले में पहले से 7 पंचायत समितियां कार्यरत हैं। इनमें जैसलमेर, सम व सांकड़ा शुरुआती दौर में गठित हुई थी, जबकि गत सरकार के कार्यकाल में फतेहगढ़, मोहनगढ़, भणियाणा और नाचना पंचायत समितियां अस्तित्व में आई।

नई पंचायत समितियां प्रस्तावित

जिले में आगामी पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों से पहले की गई कवायद में 6 नई पंचायत समितियों का प्रस्ताव किया गया है। इनमें जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में रामगढ़, झिनझिनयाली और चांधन और पोकरण विधानसभा में फलसूंड, राजमथाई और पोकरण ग्रामीण के गठन का प्रस्ताव किया गया है। सम पंचायत समिति का नामकरण अब जैसलमेर ग्रामीण के तौर पर किया गया है। इसके साथ ही जिले में 56 नई ग्राम पंचायतों के गठन का भी प्रस्ताव है। पूर्व में इनकी संख्या 206 थी, जो अब 262 हो गई है। कई ग्राम पंचायतों में मुख्यालय बदलने का प्रस्ताव किया गया है, तो कई गांवों को पुरानी ग्राम पंचायतों से नई ग्राम पंचायतों में शामिल किया गया है। इसी तरह 11 पंचायत समितियों में प्रत्येक में 20-20 ग्राम पंचायतें शामिल की गई हैं, जबकि जैसलमेर ग्रामीण और रामगढ़ में 21-21 ग्राम पंचायतों का शामिल किया गया है। पोकरण क्षेत्र की सांकड़ा पंचायत समिति का मुख्यालय अब पोकरण की बजाए सांकड़ा होगा।

दी गई है शिथिलता

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन में मरुस्थलीय जिलों जैसलमेर सहित बीकानेर, बाड़मेर और जोधपुर के लिए न्यूनतम जनसंख्या 2000 और अधिकतम 4000 तय की गई है।

अब आगे क्या

  • 6 मई तक आमजन से आपत्तियां ली जाएंगी।
  • आपत्तियों का निस्तारण 7 मई से 13 मई के बीच किया जाएगा।
  • प्रशासन की तरफ से अंतिम प्रस्ताव 11 से 20 मई के बीच पंचायती राज विभाग को भेजे जाएंगे।
  • राज्य स्तर पर यह प्रक्रिया आगामी 4 जून तक पूरी की जाएगी।