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पोकरण को मिला परमाणु नगरी नाम, देश-दुनिया में मिली पहचान

मानस पटल पर अंकित है अतीत के वे गौरवमयी क्षणÓ- गौरवमयी क्षणों को याद कर आज भी उत्साहित हो जाते हैं क्षेत्र के बाशिंदे

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पोकरण को मिला परमाणु नगरी नाम, देश-दुनिया में मिली पहचान

पोकरण को मिला परमाणु नगरी नाम, देश-दुनिया में मिली पहचान

पोकरण. '11 मई 1998, समय दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच भीषण गर्मी व तेज लू के मौसम में खेतोलाई गांव के चारों तरफ सेना का डेरा। ग्रामीणोंं को मकानों, छप्पर, टिनशेड आदि से दूर रहने की सलाह देकर पेड़ोंं की छांव में बिठाने की समझाइश करते सेना के जवान। अचानक एक के बाद एक तीन बार तेज धमाके होते है और गांव से कुछ दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में रेत का बवंडर व धुंआ आसमान में उड़ता हुआ नजर आता। धमाके के बाद लोग कुछ समझ पाते और सेना के जवानों से बात करते, इससे पहले ही जवान गाडिय़ों में सवार होकर रवाना हो जाते है। ग्रामीणों में एकबारगी कौतूहल का विषय हो गया, लेकिन धीरे-धीरे बात फैली और जानकारी मिली कि पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज की खेतोलाई की इस धरती ने 3 परमाणु बमों के धमाके सहन कर भारत की ताकत का डंका पूरे विश्व में बजा दिया है।Ó वे गौरवमयी क्षण आज भी ग्रामीण याद कर अपनी छाती चौड़ी कर लेते है और गर्व से कहते है हां हम पोकरण व खेतोलाई केे वाशिंदे है। जिस धरती ने 11 व 13 मई को कुल 5 परमाणु परीक्षणों के धमाके सहन कर अमेरिका की खूफिया एजेंसी सीआइए एवं उपग्रहोंं की नाक के नीचे सफल परीक्षण किया और चीन, पाकिस्तान जैसे देशोंं को आंख दिखाई। 18 मई 1974 और 11 व 13 मई 1998 को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में हुए परमाणु परीक्षणों की बदोलत ही पोकरण को परमाणु नगरी एवं खेतोलाई को शक्ति-98 का नाम मिला। साथ ही विश्व के मानचित्र पर पोकरण व खेतोलाई गांव उभरकर सामने आए। देश-दुनिया में मिली पहचान के कारण ही प्रतिवर्ष हजारों पर्यटकों की यहां आवक होने लगी है। यहां के वाशिंदे पर्यटकों को भी जब परमाणु परीक्षण की जानकारी देते है तो उन पलों को याद कर गौरवान्वित हो जाते है। परमाणु परीक्षण की 25वीं सालगिरह पर पत्रिका ने लोगों से विचार जाने और परिचर्चा की---

गर्व का विषय
25 वर्ष पूर्व पोकरण के खेतोलाई की धरती पर परमाणु परीक्षण करना यहां के वाशिंदों के लिए गर्व का विषय है। परीक्षण से पोकरण व खेतोलाई को पूरे विश्व में पहचान मिली है। आज इस परीक्षण के 25 वर्ष पूर्ण होने पर खुशी है।
- अशोक विश्रोई, निवासी खेतोलाई
याद आते है पल
11 मई 1998 को सैनिकों ने गांव में डेरा डाल दिया था। करीब पौने 3 बजे यहां परमाणु परीक्षण का धमाका हुआ। 1 की पल में खेतोलाई व पोकरण का नाम पूरे विश्व में गूंज उठा। वो पल आज भी याद आते है।
- शिवप्रताप विश्रोई, निवासी खेतोलाई
धमाके ने दिलाई पहचान
11 व 13 मई को सिल-सिलेवार परमाणु परीक्षण के 5 धमाकों ने खेतोलाई व पोकरण को विशेष पहचान दिलाई है। साथ ही भारत ने अपनी ताकत का एहसास पूरी दुनिया को करवाया।
- महेन्द्रसिंह भाटी, निवासी ताड़ाना
दुश्मनों को दिखाई आंख
पोकरण की धरा पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण कर दुश्मन देशों को आंख दिखाई है। सीआइए जैसी खूफिया एजेंसियों से बचकर भारत ने परमाणु परीक्षण किया। उसके लिए पोकरण की धरती पर चयन करना क्षेत्रवासियों के लिए गर्व की बात है।
- मेघसिंह राठौड़, निवासी जैमला
आते है पर्यटक
परमाणु परीक्षण से पोकरण को मिली पहचान खुशी की बात है। पूरे विश्व से पर्यटक यहां भ्रमण के लिए पहुंचते है। जिससे पर्यटन व्यवसाइयों को रोजगार भी मिल रहा है।
- महिपालसिंह चंपावत, निवासी पोकरण