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World Parrot Day Today- पालतू पक्षी के रूप में पिंजरे में कैद हैं तोते

मेरा मि_ू बोले राम राम, कविता हम सभी ने बचपन में सुनी होगी और कई लोग इस मि_ू को अपने घरों में पालते भी हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिटठू को घर के पिंजरे में बंद करना भी अपराध है। जी हां, भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत तोतों को पालना दंडनीय अपराध है लेकिन जागरुकता के अभाव और प्रशासन की उदासीनता के चलते तोते को पिंजरे में रखने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं होती।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

May 31, 2022

NC case filed after row over noisy parrot in Pune

तोते ने बुजुर्ग की नाक में किया दम

विश्व पैरेट दिवस आज
मिट्ठू को कैद करना भी अपराध
हो सकती है पांच साल की सजा
पालतू पक्षी के रूप में पिंजरे में कैद हैं तोते
कम हो रही है तोतों की भी संख्या
जयपुर
मेरा मि_ू बोले राम राम, कविता हम सभी ने बचपन में सुनी होगी और कई लोग इस मि_ू को अपने घरों में पालते भी हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिटठू को घर के पिंजरे में बंद करना भी अपराध है। जी हां, भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत तोतों को पालना दंडनीय अपराध है लेकिन जागरुकता के अभाव और प्रशासन की उदासीनता के चलते तोते को पिंजरे में रखने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं होती।
तोते को घर की शोभा बढ़ाने के क्रेज के चलते अब अन्य पशु पक्षियों की तरह इन पर भी संकट खड़ा हो रहा है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर आज विश्व में लगभग साढ़े पांच करोड़ तोते हैं जिसमें से आधे से अधिक पिंजरों में कैद हैं। अधिकाश तोते लोगों के घरों में पालतू पक्षी के रूप में कैद हैं।
हो सकती है पांच साल तक की सजा
वन्यजीव विशेषज्ञ मनीष सक्सेना का कहना है कि आम तौर पर लोग अपने घरों में तोता, कबूतर, खरगोश आदि वन्य जीवों को पालते हैं, लेकिन कम ही लोगों को यह पता होगा कि ऐसा करने पर पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। शहर से गांव तक हाट.बाजारों में तोते को कैद कर उसे घरों में पालने के साथ ही बेचते हुए देखा जाता है। लेकिन उन्हें भी यह पता नहीं होगा कि ऐसा करने पर उन्हें सजा हो सकती है। तोता, कबूतर, बुलबुल, खरगोश, पहाड़ी चूहे को कैद कर घर में रखना अपराध है। ऐसा करने पर उनके खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 49 व 51 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
बढ़ा तोतों का अवैध व्यापार
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार वर्तमान में विश्व में तोतों की 398 प्रजातियां हैं, जिसमें 18 गंभीर रूप से संकट ग्रस्त तथा 39 लुप्तप्राय हैं। मनुष्यों द्वारा जंगलों की अंधाधुन्ध कटाई,शिकार एवं अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण तोतों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। तोते पालतू पक्षी के रूप में लोकप्रिय हैं,जो अवैध व्यापार का कारण बन गया है, लोग तोतों के घोंसलों को नष्ट करते हैं जिससे की उन पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में फलदार पेड़ों की कमी के कारण तोतों की संख्या में कमी आ रही है।
सरंक्षण कार्यक्रम की जरूरत
वर्तमान में दुनियाभर में तोतों की 356 प्रजातियां हैं और इनमें से 123 प्रजातियों को खतरा है। इसका मुख्य कारण उनके हैबिटाट को क्षति पहुंचना और उन्हें पालने की ख्वाहिश है। दुनिया में बड़े पैमाने पर तोतों की खरीद.फरोख्त का कारोबार होता है जिसके चलते जंगलों में इनकी प्रजाति की आबादी में कमी आई है। बात अगर भारत की करें तो यहां तोतों की 11 प्रजातियां पाई जाती हैं। तोतों को बचाने के लिए अतिशीघ्र युद्ध स्तर पर संरक्षण कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है।
ऐसे बचा सकते हैं तोते
विशेषज्ञों की माने तो तोतों को बचाने के लिए हमें पुराने पेड़ों को बचाना होगा। उन्हें पालने के लालच से बाहर निकलना होगा। यदि व्यापार आदि के लिए उन्हें पकड़ा गया है तो उसकी सूचना वन विभाग को देनी होगी साथ ही तोते अनाज से ज्यादा फल खाना पसंद करते हैं इसलिए फलदार वृक्ष लगाने होंगे।
किया पोस्टर का विमोचन
जिला कलेक्टर और जिला क्रूरता निवारण समिति के अध्यक्ष राजन विशाल एवं एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के एनिमल वेलफेयर ऑफिसर तथा जिला पशु क्रूरता निवारण समिति के सदस्य मनीष सक्सेना ने विश्व पैरेट दिवस के अवसर पर विशेष पोस्टर का विमोचन किया। जिला कलेक्टर राजन विशाल ने बतलाया कि पक्षियों के संरक्षण में विद्यार्थियों की अहम भूमिका है। उन्होंने पक्षी संरक्षण के कार्य में ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को जोडऩे पर बल दिया और सभी नाागरिकों से अपील की है कि अपने घरों और आसपास फलदार पेड़ लगाकर पक्षियों के संरक्षण में योगदान दें।