
जयपुर। दुनियाभर में आज विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जा रहा है। कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है जो माइको बैक्टीरियम लेप्रोए के कारण होती है। जो शरीर के इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में त्वचा पर दाग, घाव, और गांठें शामिल हैं। यह बीमारी मुख्यत त्वचा, नसों, आंखों, नाक और कोमल उत्तको को प्रभावित करती है। लोगों में आज भी इस बीमारी को अछूत की तरह देखा जाता है। आज भी इस बीमारी को लेकर लोगों के दिलो दिमाग में डर हावी है।
कुष्ठ रोग का इलाज अब संभव है। अगर समय रहते पहचाना जाए और उपचार किया जाए तो इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। लेप्रोसी को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने और समाज में फैली भ्रांतियां दूर करने के लिए हर साल 30 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है।
देशभर के आंकड़ों पर नजर डाले तो कुष्ठ रोगों के मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या छत्तीसगढ़ में है। जहां 2.3 फीसदी कुष्ठ रोग के मरीज है। इसके बाद में झारखंड, महाराष्ट्र व ओडिशा सहित कई राज्यों में भी कुष्ठ रोग के मरीजों की संख्या ज्यादा है। लेकिन राजस्थान पर नजर डाले तो यहां पर कुष्ठ रोगियों का आंकड़ा 0.1 फीसदी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राजस्थान में हर साल करीब एक हजार नए कुष्ठ रोग के मामले सामने आते है।
आज से शुरू होगा अभियान..
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आज से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा। यह अभियान 13 फरवरी तक चलेगा। इस अभियान में जिला, ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक कुष्ठ रोग निवारण के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी। निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ रवि प्रकाश माथुर ने बताया कि आज प्रदेश में आयोजित होने वाली गतिविधियों के तहत सभी जिलों में जिला कलेक्टर द्वारा कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता के लिए जनता के नाम संदेश प्रसारित किया जाएगा।
कुष्ठ दिवस पर ग्राम सभाओं में सरपंच द्वारा ग्राम सभा के सदस्यों से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव दूर करने के लिए सार्थक प्रयास करने की अपील की जाएगी। साथ ही सभा में कोई कुष्ठ रोग मुक्त व्यक्ति होने पर उसे ग्राम सभा का विशिष्ट अतिथि घोषित किया जाएगा। ग्राम सभा में कुष्ठ रोग प्रभावित व्यक्तियों का ग्राम सभा प्रमुख द्वारा अभिनंदन भी किया जाएगा। इस अवसर पर कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता को लेकर प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
डॉ माथुर ने बताया कि अभियान के तहत जिला, ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर लाउड स्पीकर, समाचार-पत्रों, टीवी, रेडियो, पोस्टर, पेम्पलेट सहित अन्य प्रचार-प्रसार माध्यमों से कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही स्कूलों में प्रार्थना सभा तथा अन्य राजकीय आयोजनों में कुष्ठ रोग के संबंध में जानकारी प्रदान की जाएंगी।
विश्व कुष्ठ दिवस की थीम..
हर साल विश्व कुष्ठ दिवस की एक थीम होती है। इस साल इसकी थीम 'बीट लेप्रोसी' है। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करके जागरूकता फैलाना है। इस थीम को लेकर डब्लूएचओ का कहना है कि यह विषय इस दिन के दोहरे उद्देश्यों को समाहित करता है। कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक को मिटाना और रोग से प्रभावित लोगों की गरिमा को बढ़ावा देना है। भारत में यह हर साल 30 जनवरी यानि महात्मा गांधी के पुण्यतिथि को मनाया जाता है।
Published on:
30 Jan 2024 08:35 am
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