
Heart Attack
दिल तक जाने वाली खून की नसों में ब्लॉकेज होने पर हार्ट अटैक होता है। फैट, कोलेस्ट्रॉल व अन्य हानिकारक पदार्थों के प्रभाव से धमनियों में ब्लॉकेज होता है। जब दिल में मौजूद कोरोनरी आर्टरीज की दीवारों में ज्यादा कॉलेस्ट्रोल जमा हो जाता है तो इससे ब्लड फ्लो में दिक्कत होने लगती है जिससे हार्ट ब्लॉकेज होता है। 25-44%
भारतीय मूल के हृदय रोगियों में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य है। भारतीयों को आनुवांशिक कारणों से गंभीर हृदय रोगों की आशंका है।
17-18 की उम्र में हो जाएं सतर्क-
फैमिली हिस्ट्री है तो 17-18 वर्ष की उम्र से ही सतर्क रहें। हृदय संबंधी जन्मजात विकृति हो तो जीवनशैली को लेकर सावधानी बरतें। एल्कोहल, धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज, हाइपर कोलेस्ट्रॉल, स्लीप एप्निया और बदलती जीवनशैली में सोशल मीडिया का उपयोग स्ट्रेस बढ़ा रहा है जिससे हार्ट पर असर पड़ता है।
कैसे पहचानें-
छाती में जकड़न, पसीने आना, सांस लेने में दिक्कत, अनियंत्रित धड़कन, चक्कर आना जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। कभी बुजुर्गावस्था में होने वालीहार्ट ब्लॉकेज की समस्या अब कम उम्र में भी होने लगी है। दरअसल, खराब खानपान व तनाव का असर हमारे दिल पर भी पड़ता है। दिल की अच्छी सेहत के लिए इसका ध्यान रखना जरूरी है। खराब डाइट और लाइफस्टाइल किसी को भी हार्ट पेशेंट बना सकते हैं।
-डॉ. प्रदीप मीणा, हृदय रोग विशेषज्ञ, एसएमएस अस्पताल, जयपुर
बचाव के तरीके
Published on:
21 Aug 2022 11:44 pm
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