
विधानसभा चुनाव प्रचार और मतदान के बाद तक वाहन चोरों की मौज रही। वहीं, पीडि़तों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, चुनाव के दौरान राजधानी में रोजाना बड़ी संख्या में बाइक चोरी के मामले सामने आए, लेकिन पुलिस चोरी की एफआईआर दर्ज नहीं करके पीडि़तों को टरकाती रही। पुलिस स्टाफ की कमी तो कभी चुनाव रैलियां और वीआईपी मूवमेंट का बहाना बनाकर चोरी के केस दर्ज ही नहीं किए।
सूत्रों के अनुसार 14 से 26 नवंबर यानी 12 दिन के दौरान बाइक चोरी के 100 से अधिक मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अब पुलिस की नींद टूटी और चोरी के मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने की जहमत उठाई। सोमवार को एक ही दिन में बाइक चोरी के 20 से अधिक मामले दर्ज किए गए। पुलिस की इस लापरवाही के कारण जहां चोर बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देते रहे वहीं पीडि़त थानों के चक्कर काट-काट कर परेशान रहे।
केस - एक
एक सप्ताह बाद हुआ केस दर्ज
रामनगर सोड़ाला निवासी खगेश्वर बर्मन आंखों की जांच के लिए एसएमएस अस्पताल गए थे। वापस आए तो बाइक गायब मिली। इस बारे में एसएमएस थाने में सूचना दी, लेकिन पुलिस ने रैली और चुनाव का हवाला देकर बाद में आने को कहा। एक हफ्ते बाद 27 नवंबर को बाइक चोरी का केस दर्ज हुआ।
केस - दो
चुनाव में जाब्ता, बाद में आना
रामनगर टोल टैक्स निवासी दीपक शर्मा की 14 नवंबर को बाइक चोरी हो गई। थाने पहुंच कर मामले की जानकारी दी, लेकिन चुनाव में जाब्ता तैनात होने के कारण पुलिस ने बाद में आने के लिए कहा गया। इसके चलते करीब दो सप्ताह बाद एफआईआर दर्ज की गई।....
12 हजार में से 10 हजार की लगाई ड्यूटी
पुलिस आयुक्तालय के थानों और पुलिस लाइंस में करीब 12 हजार पुलिसकर्मी हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान इनमें से 10 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी चुनाव में लगाई गई। इस कारण राजधानी के सभी थानों में स्टाफ की कमी बनी रही और पुलिस चोरी जैसे मामले दर्ज करने से बचती रही।
Published on:
29 Nov 2023 12:52 am
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