
जयपुर। लोक देवता वीर तेजाजी व रामदेवजी दशमी आज प्रदेशभर में धूमधाम से मनाई जा रही है। रामदेवरा में जहां बाबा के दर्शनों के लिए लाखों लोग उमड़ रहे हैं। वहीं तेजाजी महाराज के स्थानों पर भी मेला लगा है। राजस्थान के कई हिस्सों में रामदेवजी व तेजाजी महाराज की झांकियां निकाली जा रही है। डीजे की धुन पर थिरकते भक्त हाथों में पताकाएं लिए अपने आराध्य की भक्ति में रंग नजर आ रहे हैं।
वीर तेजाजी यूं कहलाए लोकदेवता
लोकदेवता वीर तेजाजी का जन्म नागौर जिले के खड़नाल गांव में ताहरजी और रामकुंवरी के घर जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता गांव के मुखिया थे। तेजाजी बचपन से ही साहसी एवं वीर पुरुष थे। बचपन में ही उनके साहसिक कारनामों से लोग आश्चर्यचकित थे। ऐसी मान्यता है कि तेजाजी का विवाह उनके माता-पिता ने बचपन में पेमल के साथ कर दिया था। अपनी भाभी के बोलों से आक्रोशित होकर तेजाजी अपने ससुराल पत्नी को लेने के लिए लीलन घोड़ी से रवाना हो गए।
गायों को छुडा़ने के दौरान जंग
इस दौरान पेमल की सहेली लाखा गूजरी की गायों को चोर जंगल से चुरा ले गए थे। तेजाजी इसी मार्ग से गुजर रहे थे। जब लाखा ने उन्हें देखा तो रोककर गायों को चोरों से छुड़ाने लाने के लिए कहा। ये बात सुनकर लाखा की गायों को चोरों से छुड़ाने तेजाजी निकल पड़े। इस दौरान रास्ते में जलते सांप को देखकर वे रुके और सांप को छड़ी से उठाकर आग से अलग कर दिया। इस पर सांप ने उन्हें डसने का प्रयास किया। तेजाजी ने गायों को चोरों से छुडाने की बात कहकर सांप के पास वापस लोट आने की प्रार्थना की। इस पर सांप शांत होकर एक तरफ हो गया। इसके बाद गायों को छुड़ाने के लिए तेजाजी महाराज का चोरों से जंग हुई।
सांप ने डसने से किया था मना
डाकुओं से जंग के दौरान उनके शरीर पर गहरे घाव हो गए। जब वे वापस सांप के पास घायल होकर लौटे तो सांप ने उन्हें डसने से मना कर दिया। इस पर तेजाजी महाराज ने सांप को जीभ पर डसने के लिए कहा। इस पर सर्प ने उन्हें जीभ पर डस लिया। डसने के बाद तेजाजी धरती मां की गोद में समा गए । इसके बाद से तेजा दशमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। तेजाजी महाराज को काला- बाला के रुप में भी पूजा जाता है। वीर तेजा के थान(स्थान) पर सांप या जहरीले कीड़े से डसा घायल को लेकर जाते हैं तो घायल ठीक हो जाता है।
Published on:
19 Sept 2018 05:25 pm
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