
जयपुर. ‘आधुनिकता की दौड़ में इंसान मित्रों, रिश्तेदारों और सगे-संबंधियों से दूर होता जा रहा है। इस कारण उसे एकाकीपन, उदासी एवं मानसिक परेशानियों ने घेर लिया है। अगर मनुष्य उत्सव मनाना चाहता है तो उसके लिए सहभागिता जरूरी है। सहभागिता संयुक्त परिवार एवं मित्रों के साथ से ही संभव है।’ विद्याधर नगर स्थित मैरिज गार्डन में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को व्यासपीठ से कथा वाचक आचार्य मदन मोहन ने उक्त उद्गार व्यक्त किए। भागवत के विभिन्न श्लोक और प्रसंग के माध्यम से उन्होंने जीवन में आने वाली विभिन्न परेशानियों के समाधान भी बताए।
उन्होंने कहा कि आंतरिक विकारों पर विजय पाने वाला ही सबसे बड़ा वीर है। मनुष्य को बौद्धिक प्रगति के लिए प्रयास करने चाहिए। साथ ही साधु के विचार व व्यवहार के साथ ही महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय संस्कृति विश्व का मंगल चाहती है। सनातन धर्म के जो पुराण, महापुराण और वेदों मेंं विस्तृत रूप से प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों के उपयोग एवं विश्व कल्याण के बारे में बताया गया है। भगवान को भाव चाहिए साधन नहीं। इसके माध्यम से विश्व कल्याण की कामना भी की गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर कोई भी व्यक्ति बना सकता है, रामराज्य साधु दिला सकता है। संयोजक राजकुमार गर्ग तथा सह संयोजक गोवर्धन शर्मा, धर्मराज ने बताया कि इस मौके पर नंदोत्सव भी मनाया गया। भक्तों ने एक-दूसरे को भगवान कृष्ण के जन्म की बधाई दी। साथ ही मिठाई-खिलौनों व टॉफी आदि की उछाल की गई। 1500 से अधिक भक्तों ने भागवत कथा का अमृत पान किया। कथा के पांचवें दिन व्यास जी द्वारा श्री कृष्णा बाल लीला एवं गोवर्धन पूजा के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
Published on:
10 Aug 2023 07:23 pm
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