
जयपुर। विजयादशमी पर आज देशभर में रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। रावण दहन को लेकर कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिसके अनुरूप विभिन्न स्थानों पर दशहरा मनाया जाता है। कहीं रावण की पूजा इष्टदेव के रूप में होती है तो कहीं अधर्म के प्रतीक के रूप में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है।
नाभि पर घी से किया जाता लेप
मध्यप्रदेश के विदिशा के रावन गांव में रावण के दरबार में पहुंचकर लोग पूजा करते हैं। रावण के नाम से ही रावण गांव का नाम पड़ा है। खास बात तो यह है इस पूरे ग्राम में ब्राह्मण समाज के लोग ही निवास करते है। सभी रावण की पूजा करते हैं। बताया जाता है लंका पति रावण ब्राह्मण समाज के कुलदेवता माने जाते हैं क्योंकि रावण भी एक विधवान ब्राह्मण थे। आज भी उन्हें इसलिए कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है। यहां रावण की लेटी हुई प्रतिमा की नाभि पर घी का लेप किया जाता है, ताकि भगवान राम द्वारा रावण की नाभि में मारे गए अग्निबाण की पीड़ा से उनको राहत मिले। इसके साथ ही यहां दिनभर पूजा-अनुष्ठान होते हैं। रावण के मंदिर में करीब 10 फीट लंबी और 3 फीट चौड़ी लेटी प्रतिमा है। लोग इन्हें रावण बाबा के नाम से जानते हैं।
प्रथम पूज्य के रूप में मानते हैं लोग
यहां पर भवनों के नाम जय लंकेश के नाम पर हैं। यहां ट्रैक्टर कार दोपहिया वाहनों पर जय लंकेश लिखा रहता है। शरीर पर लोग गोदने भी जय लंकेश के गुदवाते हैं। कुल मिलाकर यहां लंकाधिपति प्रथम पूज्य देवता के रूप में माने जाते हैं।
राम की सेना पर बरसाते पत्थर
मध्यप्रदेश में लटेरी के आनंदपुर में कालादेव का दशहरा प्रसिद्ध है। यहां राम-रावण की सेनाओं के बीच पत्थर चलते हैं। बीच मैदान में रावण की प्रतीक प्रतिमा है। विजय का ध्वज लगाया जाता है। इसे हासिल करने कालादेव गांव के लोग राम के जयकारे लगाते हुए दौड़ते हैं। वे ध्वज की परिक्रमा करते हैं। इस बीच रावण की सेना माने जाने वाले भील उन पर गोफन से पत्थर बरसाते हैं। सैकड़ों पत्थरों में से भी कोई पत्थर राम सेना के लोगों को नहीं लगता। इसके बाद भगवान राम का राजतिलक किया जाता है।
Published on:
05 Oct 2022 01:51 pm
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