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राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान में दिलचस्प मुकाबला तय, कांग्रेस को चौंका सकती है भाजपा की ये रणनीति

Rajya Sabha Election 2024: राज्यसभा के लिए राजस्थान से तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव इस बार भी रोचक हो सकते हैं। चुनाव 27 फरवरी को होंगे। संख्या बल के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट पर सीधी जीत मिलती नजर आ रही है।

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Rajasthan Politics News : राज्यसभा के लिए राजस्थान से तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव इस बार भी रोचक हो सकते हैं। चुनाव 27 फरवरी को होंगे। संख्या बल के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट पर सीधी जीत मिलती नजर आ रही है। सुगबुगाहट है कि भाजपा तीसरे उम्मीदवार को भी उतार सकती है। पहले भी पार्टी ऐसा कर चुकी है, हालांकि तीसरी सीट जीत नहीं पाई थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी में मंथन चल रहा है कि तीसरी सीट के लिए कौनसे उम्मीदवार को उतारा जाए और ऐसा करें तो उम्मीदवार कौन हो। यदि ऐसा होता है तो भाजपा अपने पुराने प्रयोग को दोहराकर मुकाबले को राेचक जरूर बना देगी।


वर्ष 2016 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने विधायकों की बाड़ाबंदी की थी। इन्हें एक होटल में ले जाया गया था, ताकि क्रॉस वोटिंग की स्थिति नहीं बने। पार्टी ने वर्ष 2020 और फिर 2022 में संख्या बल नहीं होते हुए भी अन्य प्रत्याशी खड़ा किया था, जबकि एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया था।


1.वर्ष 2016- चार सीटों पर राज्यसभा चुनाव हुआ था। भाजपा ने वैंकया नायडू, ओम माथुर, हर्षवर्धन सिंह और रामकुमार वर्मा को प्रत्याशी बनाया। निर्दलीय के तौर पर उद्योगपति कमल मोरारका मैदान में उतरे। कांग्रेस ने सेंधमारी की आस में मोरारका को समर्थन भी दिया, लेकिन वे जीत नहीं पाए। सभी चारों सीटों पर भाजपा को जीत मिली।

2. वर्ष 2020- तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए कांग्रेस ने के.सी. वेणुगोपाल और नीरज डांगी को मैदान में उतारा। भाजपा ने राजेंद्र गहलोत के साथ ओंकार सिंह लखावत को भी मैदान उतार दिया, जबकि संख्या बल के हिसाब से भाजपा एक ही सीट जीत सकती थी और हुआ भी यही।


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3. वर्ष 2022- भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाया और कांग्रेस की तरफ से रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी थे। भाजपा ने सेंधमारी की आस में निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को समर्थन दिया, हालांकि चंद्रा चुनाव जीत नहीं पाए। जबकि उस समय भाजपा विधायक शोभारानी कुशवाह ने क्रॉस वोटिंग की थी। इस कारण पार्टी ने कुशवाह को निष्कासित कर दिया था।