
जयपुर। राजस्थान में वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। इस दबाव के चलते ना केवल आमजन के स्वास्थ्य पर विपरित असर पड़ रहा है, बल्कि सड़कों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी प्रदेश में प्रति हजार व्यक्तियों पर करीब 205 से ज्यादा वाहन हैं। जिस तरह से वाहनों की बिक्री हो रही है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों यह आंकड़ा और भी भयावह होगा। अभी प्रदेश में वाहनों की संख्या 1.70 करोड़ से ज्यादा है।
पांच साल में एक लाख से ज्यादा सड़क हादसे
वाहनों के बढ़ते दबाव का ही असर है कि सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2017 से 2021 के बीच राजस्थान में करीब एक लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें करीब 50 हजार लोगों की मौतें हुई हैं। इसमें 17 हजार से ज्यादा मौतें और 40 हजार के आसपास दुर्घटनाएं जयपुर, उदयपुर, अजमेर जोधपुर और अलवर में हुई हैं। वर्ष 2022 में जनवरी से मई तक 10105 सड़क हादसे हुए, जिनमें 4780 लोगों को जान गंवानी पड़ी है और 10107 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
इसलिए बढ़ रहा है दबाव
निजी वाहनों के दबाव को कम करने का एक ही तरीका है कि लोगों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की तरफ मोड़ा जाए। मगर हालात विपरीत हैं। 2010 में राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत के आसपास थी जो 2017 में 14 प्रतिशत ही रह गई है। सरकार भी इसे लेकर गंभीर नहीं है।
ये है प्रदूषण का हाल
वाहनों के बढ़ते दबाव की वजह से प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है। जयपुर में एक्यूआइ (वायु गुणवत्ता सूचकांक) बीते पखवाड़े बारिश होने के बाद थोड़ा बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। बीते चार दिन की बात की जाए तो औसतन जयपुर का प्रदूषण का स्तर 160 से 180 के बीच दर्ज किया गया। वहीं भिवाड़ी में वायु प्रदूषण का स्तर 230 से 250 एक्यूआई के बीच दर्ज किया गया।
फैक्ट फाइल
राजस्थान का कुल क्षेत्रफल—3 लाख 42 हजार 239 वर्गकिमी
कुल वाहनों की संख्या—1.70 से 1.72 करोड़
जयपुर में सर्वाधिक पंजीकृत वाहन—40 लाख
जैसलमेर में सबसे कम पंजीकृत वाहन—1.20 लाख
जयपुर में सड़कों का जाल—12 हजार किमी
हर साल टूटती है सड़कें—4 से 5 हजार किमी
सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी—5 से 7 प्रतिशत
जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी—14 प्रतिशत
प्रति हजार व्यक्ति सबसे ज्यादा वाहन वाले जिले
जयपुर—420 से 450
कोटा—260 से 270
अजमेर—260 से 270
चित्तौड़गढ़—250 से 260
जोधपुर—230 से 240
प्रति हजार व्यक्ति सबसे कम वाहन वाले जिले
करौली—110 से 115
चूरू—115 से 125
धौलपुर—130 से 140
भरतपुर—130 से 140
प्रतापगढ़—140 से 150
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सड़कों पर वाहनों के दबाव को कम करने का एक ही तरीका है कि सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दे। साथ ही 10 से 12 फुट का फुटपाथ होना चाहिए, ताकि उसमें लोग पैदल भी चल सकें और साइकिल भी चलाई जा सके।
एनसी माथुर, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर, जेडीए
Published on:
17 Feb 2023 09:56 am
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