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राजस्थान के प्राइवेट स्कूल ने लंच बॉक्स में अंडे-नॉनवेज लाने पर लगाया बैन, फरमान वायरल हुआ तो छिड़ी बहस

अभिभावकों का तर्क है कि स्कूलों में बच्चों के लंच बॉक्स में नॉन वेज या अंडा नहीं भेजना चाहिए। शहर के कई निजी स्कूलों ने भी इस तरह की पाबंदी पहले से ही लगा रखी है।

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Rajasthan News : जयपुर। राजधानी के एक निजी स्कूल की ओर से सर्कुलर अभिभावकों को भेजा गया है, जिसमें लंच बॉक्स में नॉन वेज फूड और अंडा नहीं भेजने के लिए कहा गया है। स्कूल का यह सर्कुलर सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसके बाद बहस छिड़ गई। कुछ लोगों का कहना है कि स्कूल का इस तरह का आदेश जारी करना गलत है।

वहीं, स्कूल का कहना है कि सर्कुलर जारी करने के पीछे उसका उद्देश्य बच्चे की सेहत का ध्यान रखना ही है। स्कूल के इस आदेश का अभिभावक और अन्य स्कूल भी समर्थन कर रहे हैं। अभिभावकों का तर्क है कि स्कूलों में बच्चों के लंच बॉक्स में नॉन वेज या अंडा नहीं भेजना चाहिए। शहर के कई निजी स्कूलों ने भी इस तरह की पाबंदी पहले से ही लगा रखी है।

हेल्दी फूड भेजने के आदेश

इधर, शिक्षा विभाग और सीबीएसई ने भी स्कूलों में बच्चों के लंच बॉक्स में हेल्दी फूड लाने के निर्देश दे रखे हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए भी विभाग ने हाल ही आदेश जारी किए हैं कि टिफिन में ऐसा खाना लाएं जो जो खराब न हो। डायटीशियन का भी कहना है कि नॉन वेज फूड के गर्मी में खराब होने की आशंका रहती है।

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जानिए किसने क्या कहा

डायटीशियन सुरभि पारीक का कहना है कि बच्चों को लंच बॉक्स में हेल्दी भोजन भेजना चाहिए। नॉनवेज स्पाइसी और हैवी मील होता है। इस प्रकार का भोजन लंच में देना सही नहीं है क्योंकि हैवी खाने से बच्चों को कक्षा में नींद आती हैं। बच्चे स्कूल में दूसरे बच्चों को देखकर खाना खाना सीखते हैं, इसलिए उन्हें हेल्दी फूड ही दें। इसके अलावा अगर बच्चे नॉनवेज फूड ले जाएंगे तो वे शेयरिंग हैबिट्स नहीं सीख पाएंगे, क्योंकि बहुत से बच्चे केवल शाकाहारी होते हैं।

राजस्थान संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा कि नॉन वेज फूड को लेकर विद्यालयों में सख्त गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए। शहर के अन्य स्कूलों को भी इसकी पालना करनी चाहिए। इस संबंध में अभिभावकों को सर्कुलर जारी करने चाहिए। संघ की ओर से स्कूल के इस निर्णय का स्वागत किया गया है।

स्कूल प्रिंसिपल ज्योति जोशी ने कहा कि हमारी मंशा किसी की भावना को आहत करने की नहीं थी। कक्षा में अगर बच्चा अंडा भी लाता है तो गर्मी के समय के चार घंटे में लंच बॉक्स में उसके खराब होने की आशंका है। ऐसे में वह बीमार हो सकता है। पूरी कक्षा में उसकी दुर्गंध भी हो जाती है, जिससे दूसरे बच्चों को परेशानी होती है। एक बच्चे के टिफिन में अंडा लाने की वजह से ऐसा हुआ था, हमने उसी कक्षा के लिए मैसेज दिया गया था।

स्कूल प्रिंसिपल अशोक वैद्य का कहना है कि सीबीएसई ने भी सर्कुलर जारी कर रखा है कि टिफिन में हेल्दी फूड भेजा जाए। इसके लिए देखने में आता है कि अधिकतर बच्चे वेज और हेल्दी फूड ही लाते हैं। बच्चों को लंच बॉक्स में ऐसा खाना भेजना चाहिए जो जल्दी खराब न हो।

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