विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामले को शांत करते हुए कहा कि सदस्य श्रवण कुमार द्वारा सदन में जो गया हैं उसे विलोपित किया जाता है। देवनानी ने श्रवण कुमार को चेतावनी एवं अन्य सदस्यों से अपेक्षा करते हुए कहा कि कोई भी सदस्य इस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करे। इससे सत्ता पक्ष के सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और श्रवण कुमार से माफी की मांग करने लगे।
बालकनाथ (Baba Balaknath) ने इस मुद्दे पर श्रवण कुमार से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि अगर माफी नहीं मांगी तो पूरा संत समाज इनके घर पहुंच जा एगा और इनका घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। हंगामा बढ़ता गया और भाजपा विधायक बाबा बालकनाथ, प्रतापपुरी आदि सदस्य वेल में आ गए। बाद में उन्हें सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य समझाकर वापस ले गए लेकिन हंगामें के कारण सदन की कार्यवाही पन्द्रह मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
इस दौरान गतिरोध समाप्त नहीं होने पर सदन की कार्यवाही फिर पन्द्रह मिनट के लिए स्थगित की गई और इस दौरान भी गतिरोध नहीं थमने पर तीसरी बार सदन की कार्याही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले हंगामें के दौरान विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र पारीक ने कहा कि वे सन्यासी वर्ग और सनातन धर्म का सम्मान करते हैं। यह आवेश में कही गई बात हो सकती है। ऐसा नहीं है कि सदन में आवेश में इस तरह से पहली बार बात कही गई है। ऐसा पहले कई बार हुआ है। अगर टिप्पणी अमर्यादित है तो इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जा ए। उन्होंने कहा कि यह बात सभी बाबाओं के लिए नहीं थी बल्कि जेल में बंद आसाराम जैसे बाबाओं के लिए कही थी।