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हम सब सहमत’ में दिखी अत्याचार के खिलाफ मुखर कलाकृतियां

- देशभर के 280 कलाकारों ने संजोये अपने अनुभव- आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर आयोजन- 15 अगस्त तक रहेगी जारी

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जयपुर

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Mohmad Imran

Jul 15, 2023

हम सब सहमत' में दिखी अत्याचार के खिलाफ मुखर कलाकृतियां

हम सब सहमत' में दिखी अत्याचार के खिलाफ मुखर कलाकृतियां

जयपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर जवाहर कला केन्द्र में शनिवार, 15 जुलाई से प्रदर्शनी 'हम सब सहमत' की शुरुआत हुई। 'नव को पहचान और अनुभव को सम्मान' के ध्येय के साथ आगे बढ़ रही केन्द्र की पहल कला संसार के तहत सफदर हाशमी मेमोरियल ट्रस्ट (सहमत) से संयुक्त तत्वावधान में प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय,हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओम थानवी, जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक प्रियंका जोधावत व केन्द्र की शासी परिषद के सदस्य गजानंद मानव मिश्रा ने दीप जलाकर उद्घाटन किया। इस दौरान क्यूरेटर राम रहमान अबान रजा व अन्य गणमान्य मौजूद रहे। 15 अगस्त तक अलंकार दीर्घा में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी जारी रहेगी। इसमें देशभर के 280 कलाकारों के फोटो, पेंटिंग्स व कविताएं देखने को मिलेंगी।

अलंकार में प्रवेश करते ही आप एक ऐसी दुनिया में पहुंच जाते हैं जहां हर कलाकृति मुखर है देश के ज्वलंत मुद्दों जैसे महिला अत्याचार, साम्प्रदायिकता, लोकतंत्र के गिरते मूल्यों आदि के खिलाफ। टाट की बोरियों पर विभिन्न कलाकृतियों को संजोकर सादगीभरे अंदाज में यहाँ दर्शाया गया है। सहमत के संस्थापक सोहेल हाशमी का कहना है कि ये टाट की बोरियां जहां जमीन से जुड़ाव को दर्शाती हैं वहीं स्वदेशी उत्पादों के समर्थन को भी जाहिर करती है।

उन्होंने बताया कि आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर के कलाकारों से प्रतिक्रिया मांगी गयी, निर्भीक कलाकारों ने समाज की वेदना को पेंटिंग्स, फोटो व कविताओं के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है। कलाकृतियों को देखने पर देश के अलग-अलग हिस्सों के कलाकार सहमत दिखाई दिए देश के गंभीर हालातों को लेकर। यह प्रदर्शनी दिल्ली, पटियाला, भोपाल, अजमेर, कोलकाता, मुंसियारी के बाद जयपुर पहुंची है।

प्रदर्शनी में शकुंतला कुलकर्णी, मीरा देवी दयाल, नीलिमा शेख, विवान सुंदरम सरीखे चित्रकार एवं विष्णु नागर, मृदुला गर्ग, अख़लाक़ आहन, राजेश जोशी जैसे कवि और प्रसिद्ध फोटोग्राफर्स की कलाकृतियां शामिल हैं। नौशीन खान कि कविता 'हम सब फूल हैं इसके बगीचे के, ये बगीचा गुलिस्तां है हमारा, सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा' राष्ट्रीय एकता की बात करती है तो विष्णु नागर की पंक्तियां 'बोलने वाले कम न हो, चुप रहने वाले ज्यादा ना हो' अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को बताती है।