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प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का इतिहास रचा, बदला 35 जिलों का भूगोल…राजस्थान में अब 50 जिले,10 संभाग

- नए जिलों की 7 को मंत्रोच्चार के बीच रखी जाएगी आधारशिला, सीएम बोले यह विजन 2030 का हिस्सा- एक चौथाई आबादी के पते बदले, और जिलों का विकल्प खुला, रामलुभाया कमेटी का कार्यकाल 6 माह बढ़ा

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जयपुर। राज्य मंत्रिमंडल ने 19 नए जिलों का गठन सहित 35 जिलों और 3 नए संभागों के गठन सहित 7 संभागों के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। पुनर्गठन को लेकर अधिसूचना जारी हाेने के साथ ही राजस्थान में अब जिले 33 से बढ़कर 50 और संभाग 7 से बढ़कर 10 हो जाएंगे। शनिवार को मंत्रिमंडल की आज्ञा जारी होने के साथ पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होने की प्रक्रिया तेज हो गई। राजस्थान के प्रशासनिक ढांचे का यह अब तक का सबसे बड़ा पुनर्गठन है। इससे जहां प्रदेश के 200 में से 120 विधानसभा क्षेत्रों पर असर होगा, वहीं लगभग दो करोड़ आबादी के पते बदल जाएंगे।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि नए जिलों के गठन का प्रयोग विजन 2030 को ध्यान में रखते हुए विकास, निवेश व कानून व्यवस्था की बेहतरी के लिए किया है। और नए जिलों की संभावना तलाशी जा रही है, जिसके लिए रामलुभाया कमेटी का कार्यकाल 6 माह और बढ़ा दिया है। प्रभारी मंत्री सात अगस्त को मंत्रोच्चार और भारतीय संस्कृति के साथ नए जिलों का विधिवत शुभारम्भ करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं विजन 2030 के लिए सभी से सुझाव आमंत्रित करता हूं। मुख्यमंत्री गहलोत ने शुक्रवार को यहां मंत्रिमंडल की बैठक में नए जिलों की अधिसूचना को मंजूरी देने के बाद अपने राजकीय निवास पर मीडिया को यह जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने रिमोट के माध्यम से नए जिलों का शुभारम्भ किया।
जयपुर-जोधपुर जिलों में जिला परिषद नहीं होगी
मौजूदा जयपर और जोधपुर जिले में नगर निगम क्षेत्र को ही रखा गया है, जबकि नगर निगम सीमा से बाहर वाली तहसीलों को जयपुर ग्रामीण और जोधपुर ग्रामीण जिला नाम दिया गया है। इससे जयपुर और जोधपुर जिले ऐसे होंगे, जहां पूरी तरह शहरी इलाका होने से जिला परिषद नहीं होगी। नए जिलों कलक्टर, एसपी और जिला स्तर के कार्यालयों के लिए शनिवार को नए पदों का सृजन भी कर दिया गया। इन कार्यालयों के लिए पिछले दिनों इन जिलों में लगाए गए विशेषाधिकारियों ने खाका तैयार कर लिया था। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि नए जिलों के लिए अधिकारियों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
95 जिलों में 5 लाख से कम आबादी
छोटे जिलों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 95 जिले ऐसे हैं, जहां 5 लाख से भी कम आबादी है। मंत्री भजन लाल जाटव की वैर और गोविन्दराम मेघवाल की खाजूवाला को जिला बनाने की मांग पूरी नहीं होने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि रामलुभाया कमेटी का कार्यकाल इसी तरह के मामलों को लेकर बढ़ाया है।
जिले की औसत आबादी 15.5 लाख, क्षेत्र 260 वर्ग किमी
राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने कहा कि मेरी मुख्यमंत्री से मांग है आगे और भी जिले बनें, कुछ छोटे जिले भी बनाए जाएं। लोगों के साथ भाजपा वालों की भी जिलों की मांग आ रही है। छोटे जिले बनने से महात्मा गांधी का सपना पूरा होगा। उन्होंने कहा कि ज्यादा एमपी-एमएलए आएंगे तो काम भी ज्यादा होगा।
राजस्थान बनेगा गवर्नेंस का मॉडल-सीएस
मुख्य सचिव उषा शर्मा ने कहा कि नए जिले बनने का क्या फायदा होगा, यह मैं जानती हूं क्योंकि मैं कलक्टर रहीं हूं। कलक्टर 90 समितियों का अध्यक्ष होता है, वह जिलों के साथ न्याय नहीं कर पाता। 19 जिले बनने से राजस्थान गवर्नेंस का मॉडल बन जाएगा। अब शिकायतों के प्रभावी निस्तारण के साथ ही निवेश भी आएगा, जिससे नए जिलों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। छोटा जिला होगा, तो प्रशासन प्रभावी कार्य कर पाएगा।
दो अगस्त को प्राप्त हुई रिपोर्ट
राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि जिलों के गठन को लेकर 21 मार्च 2022 को रामलुभाया कमेटी का गठन किया, जिसने दो अगस्त को राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी। मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को कमेटी की सिफारिशों का अनुमोदन कर दिया।
दूदू सबसे छोटा, जैसलमेर सबसे बड़ा जिला
राजस्थान में अब दूदू सबसे छोटा जिला होगा। दूदू जिले में एक ही विधानसभा क्षेत्र रहेगा। क्षेत्रफल के हिसाब से जैसलमेर अभी भी सबसे बड़ा जिला रहेगा।