
चारों तरफ गोबर की रेवडिय़ों के ढेर पड़े हैं तो विद्यालय का पूरा भवन क्षतिग्रस्त हो रहा है। भवन की दीवारें इतनी चौड़ी हो रही हैं कि उनमें से कभी बिच्छू तो कभी सांप निकल रहे हैं। पढ़ाने के साथ ही शिक्षकों को यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि दरारों में से कोई जहरीला जंतु निकलकर बच्चों को काट नहीं ले।
विद्यालय में निकल रहे जहरीले जंतुओं के डर से कई बच्चे तो पास के पीपरवाला विद्यालय में पढऩे जाने लगे हैं। नैनवां उपखंड की सुवानिया पंचायत के खोलाड़ा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय के यही हाल हैं। गुरुवार को तो एक कक्षा कक्ष में पढ़ रहे बच्चों के बीच एक साथ दो बिच्छू निकल आए। दरारों से बाहर निकलते ही बच्चों का बिच्छुओं पर ध्यान पड़ गया।
इधर, शिक्षक बिच्छुओं को मार ही रहे थे कि उधर रसोई की दरार से वाइपर प्रजाति का सर्प निकल आया तो पोषाहार बना रही दोनों महिलाएं भागकर रसोई से बाहर निकली। सांप को मारा जाता, उससे पहले ही वापस दरार में घुस गया। पोषाहार बनाने वाली महिलाओं मोहनीबाई व कन्याबाई ने बताया कि विद्यालय के अन्दर आए दिन बिच्छू व सांप निकल रहे हैं। सुबह कमरों का झाडू लगाया जाता है तो प्रतिदिन किसी न किसी कमरे में बिच्छू रेंगते हुए मिलते हैं।
टूटी पट्टियां, एंगलों का सहारा
विद्यालय भवन इतना क्षतिग्रस्त है कि किसी भी समय धराशायी हो सकता है। हर कक्ष में दरारें आ रही हैं। तीन कक्षा कक्षों की पट्टियां टूटी हुई हैं। पट्टियां नीचे नहीं आ जाएं, इसके लिए लोहे की एंगल लगा रखे हैं। विद्यालय के नौनिहालों को खतरे के बीच भवन के क्षतिग्रस्त कमरों में ही बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। शौचालय में भी दरारें पड़ी हुई हैं। दरारें इतनी चौड़ी हो गई कि शौचालय कभी भी धराशायी हो सकता है।
विद्यालय के अध्यापक जगदीप सिंह व मोरपाल का कहना है कि बरसात शुरू होते ही कभी प्लास्टर तो कभी चूना पत्थर गिरने लगता है। इससे बच्चों की छुट्टी करके स्टाफ को एक सुरक्षित कमरे में आकर बैठना पड़ता है। विद्यालय के बाहर चारों तरफ अतिक्रमण हो रहा है। जहां गोबर की रेवडिय़ों के ढेर पड़े हैं। बरसात होते ही रेवडियों से आने वाली दुर्गंध से भी बच्चे व स्कूल स्टाफ परेशान है।
प्रधानाध्यापक का कहना
विभाग को कई बार पत्र लिखकर भवन क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी जा चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। जहरीले जंतुओं के डर से पहली व दूसरी में पढऩे वाले बच्चों को अभिभावकों ने दूसरे गांव के विद्यालय में भेजना शुरू कर दिया। बाहर हो रहे अतिक्रमण हटाने के लिए भी प्रशासन को कई पत्र लिखे जा चुके हैं।
सूरजभान जाट, प्रधानाध्यापक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खोलाड़ा
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