16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गर्भपात ने हमारे घरों को बूचडख़ाना बना दिया – मुनि प्रसन्न सागर

मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि जिस देश में गर्भकल्याणक महोत्सव मनाया जाता है, आज उसी देश में गर्भपात का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है।

2 min read
Google source verification
Abortion in India

जयपुर। मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि इस देश का दुर्भाग्य तो देखिए, जिस देश में गर्भकल्याणक महोत्सव मनाया जाता है, आज उसी देश में गर्भपात का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं, जिसमें गर्भकल्याणक पहला है, जिसे सम्पन्न करने स्वर्ग से देव इन्द्र आते हैं।

शहरो में ऐसे क्लीनिकों की बाढ़ आ गयी है, जहां गर्भ परीक्षण करके अवैध तरीके से चोरी छिपे कन्या भू्रण हत्या करा दी जाती है। इसी कारण स्त्री पुरुष के बीच आनुपातिक संतुलन बिगड़ रहा है। गर्भपात ने आज हमारे घरों को बूचडखाना बना दिया है। एक गर्भपात हजारों जन्मों के पाप का दोष दिलाता है। मुनि प्रसन्न सागर बुधवार को जनकपुरी ज्योतिनगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में शुरू हुए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रवचन कर रहे थे।

मंदिर में प्रथम तल पर नवनिर्मित सहस्रकूट जिनालय में स्थित 1008 मूर्तियों व 4 नई प्रतिमाओं का पंचकल्याणक समारोह घटयात्रा जुलूस के साथ शुरू हुआ। जुलूस में महिलाएं केसरिया वस्त्र पहने और पुरूष सज-धज कर कलश लेकर नाचते गाते शामिल हुए, वहीं युवाओं ने आनन्दोत्सव मनाया। बैंडबाजे के बीच परम्परागत बग्घियों मे सौधर्म इन्द्र, कुबेर, यज्ञनायक सहित सभी इन्द्र सपत्नीक बैठे हुए थे।

मुनि प्रसन्नसागर व मुनि पीयूषसागर, आर्यिकागौरवमती माताजी ससंघ सान्निध्य में जुलूस जनकपुरी ज्योतिनगर मंदिर से शुरू होकर इमली फाटक से ज्योतिनगर होता हुआ अमरूदों के बाग पहुंचा। यहां पूजा अर्चना से साथ पंचकल्याणक के कार्यक्रम शुरू हुए। इसके बाद जनकपुरी ज्योतिनगर मंदिर में सहस्त्रकूट जिनालय की वेदी शुद्धि के कार्यक्रम हुए। महोत्सव में गुरुवार को गर्भकल्याणक में सौधर्म इन्द्रसभा, रत्नों की वृष्टि, सोलह स्वप्न एवं सोलह स्वप्नों का राजदरबार में फलादेश के आयोजन होंगे।

पाषाण से परमात्मा बनने की क्रिया पंचकल्याणक
मुनि प्रसन्न सागर ने कहा कि गर्भकल्याण की क्रिया से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आरम्भ हो रहा है। सनातन परम्परा कहती है कि जब जब धरती पर पाप अत्याचार बढेंगे तब परमात्मा सृष्टि पर अवतार लेंगे, लेकिन जैन दर्शन कहता है कि दूध यदि एक बार घी बन जाए तो पुन: दूध नही बन पाता है। पंचकल्याणक का अर्थ है कंकड से शंकर की यात्रा, नर से नारायण की यात्रा का नाम पंचकल्याणक है। पंचकल्याणक ऐसे महापर्व है जिनके मध्य पाषाण को परमात्मा बनाया जाता है। यह ऐसा स्वर्णिम मानव मेला है जहां वीतरागता से मेल होता है।

पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव आज से
मुनि विश्रांत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सिद्धार्थ नगर जैन मंदिर में गुरुवार से 12 फरवरी तक पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। पंच कल्याणक का शुभारम्भ श्रीजी की शोभायात्रा के साथ होगा। इसके बाद ध्वजारोहण से होगा। गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक मनाया जाएगा। 9 फरवरी को जन्म कल्याणक जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा होगी।