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महापौर सौम्या गुर्जर ने किया रैन बसेरों का निरीक्षण, व्यवस्थाओं की लिया जायजा

ग्रेटर निगम महापौर सौम्या गुर्जर ने मंगलवार देर रात शहर के विभिन्न स्थाई और अस्थाई रैनबसेरों (शेल्टर होम) का औचक निरीक्षण कर रैनबसेरों में साफ-सफाई, सर्दी के बचाव के संसाधनों, अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रैन बसेरों में माकूल व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Dec 21, 2022

जयपुर। ग्रेटर निगम महापौर सौम्या गुर्जर ने मंगलवार देर रात शहर के विभिन्न स्थाई और अस्थाई रैनबसेरों (शेल्टर होम) का औचक निरीक्षण कर रैनबसेरों में साफ-सफाई, सर्दी के बचाव के संसाधनों, अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रैन बसेरों में माकूल व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए। गुर्जर ने सांगानेर थाने के सामने पुलिया के नीचे स्थित रैनबसेरे से औचक निरीक्षण की शुरुआत की।

रात 11 बजे से 3 बजे तक वे सांगानेर, महारानी फार्म, त्रिवेणी नगर पुलिया, अजमेर रोड 200 फीट बाइपास, गौरव टावर, गांधी नगर रेलवे स्टेशन, जेके लोन अस्पताल के मुख्य द्वार के पास रामनिवास बाग गेट के पास, विद्याधर नगर स्थित आदि अस्थाई रैनबसेरों एवं थड़ी मार्केट स्थित स्थाई रैनबसेरों का निरीक्षण किया। सांगानेर थाने के सामने पुलिया के नीचे बने रैनबसेरे में महापौर जब पहुंची तो वहां सो रहे लोगों की संख्या के बारे में महापौर ने वहां मौजूद सुरक्षा गार्डों से पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां 80 लोग सो रहे हैं। जबकि इस रैनबसेरे में 100 लोगों की रुकने की व्यवस्था है।

लोगों से बात कर जाना हाल

महापौर ने महारानी फार्म स्थित रैनबसेरों में सो रहे कुछ लोगों से बात की और पूछा कि यहा कब से सो रहे हो। तो उन में से एक दो लोगों ने बताया कि वे मजदूरी के लिए जयपुर आए हैं और यहां पिछले एक माह से रह रहे है। इस दौरान कुछ लोगों ने पूछताछ में बताया कि यहां खाना एवं रहना तो फ्री मिल रहा है, लेकिन सुबह जब पास के सुलभ शौचालय में जाते है तो वहां नहाने-धोने के 10 से 15 रुपये लेते है जबकि हम उनको शेल्टर होम की पर्ची दिखाते है, तो भी ये नही मानते है। इस पर महापौर ने तुरंन्त जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

सड़क से उठाकर रैन बसेरे में दिलवाई जगह

निरीक्षण के दौरान महापौर को सड़क के किनारे फुटपाथ पर कई लोग खुले में कम्बल चादर में ठिठुरते दिखे, जिस पर उन्होंने मौके पर गाड़ी रोककर उनसे बात की। सामने आा कि पंजीकरण के लिये आवश्यक दस्तावेज नहीं होने की वजह से उन्हें एंट्री नहीं मिली। महापौर ने उन्हें पास के रैनबसेरे में ले जाकर उन्हें सोने-रहने की जगह दिलवाई।

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