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Rajasthan Politics : CWC में राजस्थान के ‘7 रत्न’, फिर फॉर्म में सचिन पायलट

Rajasthan Politics : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने निर्वाचन के करीब दस महीने बाद कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की घोषणा की। 39 सदस्यीय इस कमेटी में गांधी परिवार की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शामिल किया है।

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rajasthan politics : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने निर्वाचन के करीब दस महीने बाद कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की घोषणा की। 39 सदस्यीय इस कमेटी में गांधी परिवार की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शामिल किया है। खरगे ने इस सूची के माध्यम से सभी को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है। यही वजह है कि उनके सामने अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले सांसद शशि थरूर और जी-23 में शामिल रहे आनंद शर्मा को जगह दी गई है। इसके अलावा सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से सभी को साधने की कोशिश की गई है। राजस्थान के 4, मध्यप्रदेश के 2 और छत्तीसगढ़ के 1 नेता को सीडब्ल्यूसी सूची में जगह मिली है। इसके अलावा 32 स्थायी और 13 विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति की गई है।

कांग्रेस के लिए राजस्थान का विधानसभा चुनाव खासा अहम माना जा रहा है। यहां हर पांच साल में सरकार पलटने के रिवाज को तोड़ने के लिए कांग्रेस दमखम लगाने में जुटी हुई है। चुनावी अभियान को धार देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की रीति-नीति तय करने वाली सबसे बड़ी कमेटी कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी, स्थायी समिति और विशेष आमंत्रित समिति में राजस्थान के सात नेताओं को जगह दी है।

दरअसल, राजस्थान में कांग्रेस लंबे समय तक कलह से जूझती रही है। कलह को समाप्त करवाने के लिए करीब डेढ़ महीने पहले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के आवास पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट समेत अन्य नेताओं की बैठक हुई थी। इसके बाद पार्टी में बयानबाजी का दौर थमता दिखा। अब खरगे ने सीडब्ल्यूसी में राजस्थान की भागीदार 4 से बढ़ाकर 7 नेताओं की की है। इससे कार्यकर्ताओं और नेताओं को आगे बढ़ने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने का संदेश दिया है।

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सिंघवी खास सिपहसालार
राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी गांधी परिवार के खास सिपहसालारों में माने जाते हैं। पार्टी की कानूनी लड़ाई में सिंघवी की अहम भूमिका रहती आई है। हाल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल कराने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा भाजपा पर हमला करने वाले तेजतर्रार वक्ताओं में सिंघवी का नाम शामिल है। पार्टी उनका उपयोग राजस्थान के विधानसभा चुनावों में करती दिखेगी।

-जितेन्द्र पर भरोसा बरकरार
कांग्रेस महासचिव जितेन्द्र सिंह पर गांधी परिवार का भरोसा बरकरार है। वे केन्द्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय है और राहुल गांधी के काफी नजदीक माने जाते हैं। फिलहाल असम के प्रभारी होने के साथ उन्हें मध्यप्रदेश की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष भी बना रखा है। राजस्थान की सियासत में जितेन्द्र अधिक दखल नहीं देते हैं, लेकिन उनका भी राज्य में खासा असर माना जाता है।

तीन साल बाद पायलट को मिला पद
सचिन पायलट को करीब तीन साल बाद पार्टी ने पद दिया है। मानेसर की घटना के बाद उन्हें डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी से हटाया गया था। इसके बाद उनको लेकर कई बार अटकलों का दौर चला, लेकिन अब पार्टी में सबकुछ पटरी पर आता दिख रहा है। पायलट भी कह चुके थे कि, खरगे उन्हें जो भी जिम्मेदारी देंगे, वे उसे निभाएंगे। सीडब्ल्यूसी सदस्य नियुक्त होने के बाद पायलट ने खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का आभार जताया। साथ ही कहा कि कांग्रेस की रीति-नीति को मजबूत कर उसे अधिक मजबूती से जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

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मालवीया को बनाकर आदिवासियों में संदेश
बांसवाड़ा जिले के रहने वाले आदिवासी नेता व कैबिनेट मंत्री महेन्द्र जीत सिंह मालवीया को शामिल करना कार्यकर्ताओं के लिए अहम संदेश है। मालवीया की सियासत सरपंच से शुरू हुई थी और वे सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ते हुए सीडब्ल्यूसी तक पहुंचे हैं। बांसवाड़ा के साथ मालवीया का असर वागड़ व मेवाड़ अंचल के आदिवासी इलाकों में है। ऐसे में मालवीया को दूर-दराज के क्षेत्र से लाकर पार्टी की सबसे बड़ी कमेटी में सदस्य बनाना खासा अहम माना जा रहा है।

-पवन खेड़ा-प्रचार की रणनीति बनाने का जिम्मा
मूलत: उदयपुर के रहने वाले पवन खेड़ा लंबे समय से पार्टी के प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में उनके पास मीडिया व प्रचार विभाग की जिम्मेदारी है। पार्टी के प्रचार की रणनीति और नेरेटिव बनाने का काम कर रहे हैं। खेड़ा को सीडब्ल्यूसी के विशेष आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया है।

अच्छे वक्ता मोहन प्रकाश
मोहन प्रकाश ब्राह्मण वर्ग से हैं और अच्छे वक्ताओं में उनकी गिनती होती है। पार्टी में वे महासचिव रहते हुए कई राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं। उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए पार्टी ने उन्हें स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में शामिल किया है।

चौधरी: पिछड़ी जाति का चेहरा
पंजाब के प्रभारी हरीश चौधरी पिछड़ी जाति के चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। साथ ही राहुल के नजदीकी नेताओं में शुमार है। जाट बाहुल्य इलाकों में चौधरी का उपयोग चुनाव प्रचार में किया जाएगा। चौधरी को प्रभारी के नाते स्थायी आमंत्रित सदस्यों में शुमार किया है।

39 सदस्यीय सीडब्ल्यूसी में सिर्फ 6 महिलाओं को जगह दी गई है। यह महज 15 फीसदी हिस्सेदारी है। इसी तरह 50 साल से कम उम्र के 3 नेताओं को जगह मिली है। जबकि कांग्रेस ने संगठन में 50 फीसदी पद इन्हीं में से भरने की घोषणा की थी।


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