
जयपुर।
राजस्थान का ऐसा शूरवीर यौद्धा जिसने धन और भूमि को छोड़ दिया, पर उसने कभी अपना सिर नहीं झुकाया। हिंदुस्तान के राजाओं में महाराणा प्रताप ( Maharana Pratap ) ही एकमात्र ऐसे राजा है, जिन्होंने अपनी जाति के गौरव को बनाए रखा। शौर्य, पराक्रम और वीरता से मुगलों को लोहे के चने चबाने वाले राजस्थान के शूरवीर महाराणा प्रताप का भाला, तलवार और कवच का वजन 208 किलो था। इतने भार को लेकर वह चेतक पर हवा की गति से रण भूमि में चलते थे। खुद महाराणा का वजन 110 किलो और हाईट 7 फीट 5 इंच थी। भारीभरकम महाराणा प्रताप के साथ 208 किलो का अतिरिक्त भार लेकर चेतक रण भूमि में हवा से बातें करता था। इतना वजन लेकर चेतक ( chetak ) 26 फीट नाले को लांघ गया था और मुगल सेना ये चमत्कार देखती रह गई थी। महाराणा जब रण भूमि में उतरते थे तो शत्रुओं के पीसने छूट जाते थे।
महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर भी मतभेद है। मेवाड़ में महाराणा प्रताप की जयंती 6 जून को मनाई जाती है। जबकि गूगल और विकीपीडिया पर महाराणा प्रताप के जन्म की तारीख 9 मई लिखी हुई है। इस अनुसार लोग महाराणा प्रताप जयंती 9 मई को मानते हैं। जबकि मेवाड़ में महाराणा प्रताप जयंती तारीख से नहीं बल्कि तिथि अनुसार मनाई जाती है।
81 किलो का भाला लेकर एक हाथ से ही करते थे अचूक वार
महाराणा प्रताप के भाले का वजन ही 81 किलो था जिसे वह एक हाथ में लेकर आसानी से शत्रुओं पर वार करते थे। महाराणा का वार भी अचूक था। जिससे शत्रु सेना थर-थर कांपती थी। उनका कवच भी 72 किलो का था। 18 जून, 1576 को अकबर की सेना के साथ हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा ने शत्रुओं के पसीने छुड़ा दिए थे। राजा मानसिंह ने अकबर की ओर से हल्दी घाटी के मैदान में महाराणा को ललकारा था। हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक, इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की वीरता और उनके शौर्य ने उन्हें महान बना दिया।
प्रिय घोड़े चेतक ( Chetak ) को आज किया जाता है याद
चेतक महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा था। महाराणा प्रताप की तरह ही उनका घोड़ा चेतक भी काफी बहादुर था। हल्दी घाटी युद्ध के दौरान मुगल सेना उनके पीछे पड़ी थी तो चेतक ने महाराणा प्रताप को अपनी पीठ पर बैठाकर 26 फीट लंबे नाले को पार किया था। हल्दीघाटी की लड़ाई में उनका वफादार घोड़ा चेतक गंभीर रूप से जख्मी होने की वजह से मारा गया। लेकिन इस शहादत ने उसे खासी शोहरत दिलाई। आज भी चित्तौड़ की हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है।
महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी था हल्दी घाटी युद्ध ( Haldighati Yudh )
मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि इस युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही महाराणा प्रताप हारे। कहा जाता है कि अकबर ने महाराणा को समझाने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था, जिससे युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके, लेकिन महाराणा ने यह कहते हुए हर बार उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया कि राजपूत योद्धा यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
प्रताप ने की थीं 11 शादियां
महाराणा प्रताप ने 11 शादियां की थीं। कहा जाता है कि उन्होंने ये सभी शादियां राजनैतिक कारणों से की थीं। महाराणा प्रताप के 17 बेटे और 5 बेटियां थीं। हल्दी घाटी युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप जंगल-जंगल भटक रहे थे तब उन्होंने घास की रोटी भी खाई।
Published on:
06 Jun 2019 09:00 am
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