
जयपुर. जल भवन में तैनात मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण और अधिशासी अभियंता वर्षों से फील्ड से दूर हैं। अब इन इंजीनियरों को 10 संभागों के 50 जिलों का प्रभारी बनाया गया है। ये सभी संबंधित जिलों में जाकर जल जीवन मिशन और शहरी पेयजल परियोजनाओं की मॉनिटरिंग व गुणवत्ता की जांच करेंगे। इन आदेश के बाद अब फील्ड इंजीनियरों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उनका कहना है कि जिन इंजीनियरों को जिलों का प्रभारी बनाया गया है उनमें से 90 फीसदी इंजीनियर वर्षों से फील्ड से दूर हैं। उनको वर्तमान में फील
ऐसे फेल हुई थी व्यवस्था
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन में जयपुर 33वें पायदान पर आया तो जल भवन में तैनात मुख्य अभियंता और अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को जिलों का प्रभारी बनाया गया। कुछ मुख्य अभियंताओं को तो उनके गृ़ह जिले का ही प्रभारी बनाया गया। वे शनिवार और रविवार के अवकाश के दिन अपने गृह जिले में पहुंच कर ड्यूटी पूरी करते रहे और पोर्टल पर दौरे की रिपोर्ट भेजते रहे। इस कारण यह व्यवस्था कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
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एक ही दिन में पता लगाएंगे पेयजल समस्याएं
प्रभारी अधिकारी अपने प्रभार वाले जिले में सर्वाधिक जनसंख्या वाले दो गांव व कस्बों में जाएंगे, जहां पानी की विकट समस्या है। ऐसे में इंजीनियरों को एक ही दिन में किसी गांव या कस्बे की पेयजल समस्या का कैसे पता चलेगा और कैसे निराकरण कराएंगे... इसको लेकर भी इंजीनियरों में चर्चा बनी हुई है।
31 मार्च तक लक्ष्य पूरे करने की मशक्कत
अब जलदाय इंजीनियर 31 मार्च तक जल जीवन मिशन के तहत जल कनेक्शन के लक्ष्य पूरे करने की मशक्कत कर रहे हैं। लेकिन हालात ऐसे हैं कि मिशन की 90 फीसदी पेयजल परियोजनाओं के तो अभी टैंडर भी नहीं हो सके हैं।
Published on:
11 Feb 2024 11:04 pm
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